1200 Ganesh Idols And 700 Kg Nirmalya: पर्यावरण संरक्षण, नदी प्रदूषण रोकने और स्वच्छता का संदेश देने के उद्देश्य से 'हरित कुंभ' संकल्पना के अंतर्गत गणेश मूर्ति संकलन और कृत्रिम तालाबों में विसर्जन का विशेष अभियान चलाया गया।
गणेशोत्सव के पांचवें दिन नासिक के जागरूक नागरिकों ने बढ़-चढ़कर इस उपक्रम में हिस्सा लिया और पर्यावरण-पूरक गणेशोत्सव मनाने की एक शानदार मिसाल पेश की। पिछले दस वर्षों से लगातार चलाए जा रहे इस गणेश मूर्ति संकलन अभियान का मुख्य उद्देश्य पवित्र गोदावरी और उसकी उपनदियों को जल प्रदूषण से बचाना है।
नदियों में मूर्तियों, निर्माल्य और अन्य पूजन सामग्रियों के सीधे विसर्जन से लगातार बढ़ता जल प्रदूषण एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए निशिकांत पगारे, प्रा. सोमनाथ मुठाल, योगेश बवें और यशवंत नासिककर सहित अन्य समन्वयकों ने शहरवासियों से अपील की थी कि वे प्राकृतिक जलाशयों के बजाय कृत्रिम तालाबों का उपयोग करें।
हरित कुंभ के माध्यम से नदी स्वच्छ तो पर्यावरण सुरक्षित का यह महत्वपूर्ण संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। मूर्ति संकलन केंद्रों, कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था, निर्माल्य संकलन और विशेष जनजागृति कार्यक्रमों के जरिए इस पर्यावरण-पूरक आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया गया है।
इस सराहनीय उपक्रम में नासिक महानगरपालिका और हरित कुंभ समन्वय समिति के साथ-साथ एचपीटी/आरवायके कॉलेज तथा वी. एन. नाईक शिक्षण संस्था संचालित हिंदी प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय (राणे नगर, नासिक) के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने विशेष योगदान दिया।
इस पूरे अभियान को सफल बनाने में कांचन देसले, शितल बिहाडे, राजेंद्र गोसावी, गीता बागुल, संजय इलग, योगेश धात्रक और मंगेश बिरारी सहित कई शिक्षकों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने बेहद अहम भूमिका निभाई।
पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों ने स्वेच्छा से आगे आते हुए विभिन्न गणेश मूर्ति संकलन केंद्रों पर पहुंचकर सराहनीय सहयोग दिया। इस दौरान नागरिकों द्वारा लगभग 1200 मूर्तियों और 700 किलोग्राम निर्माल्य का सफल संकलन किया गया।
नागरिकों का यह अभूतपूर्व सहयोग इस बात का प्रमाण है कि समाज अब पर्यावरण संवर्धन के प्रति गंभीर हो रहा है, जो आने वाले समय में अन्य लोगों के लिए भी एक बड़ा प्रेरणा स्रोत बनेगा।