UN में भारत का सख्त संदेश: भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बननी चाहिए समुद्री आवाजाही

UN Security Council: UN सुरक्षा परिषद में भारत ने कहा कि कमर्शियल समुद्री आवाजाही भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बननी चाहिए और वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए सहयोग जरूरी है।
Parvathaneni Harish
परवथानेनी हरीशसोर्स-सोशल मीडिया
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Parvathaneni Harish On Hormuz Strait: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को किसी भी भू-राजनीतिक संघर्ष का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि नेविगेशन की स्वतंत्रता, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने नाविकों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों को खुला रखने के लिए वैश्विक सहयोग पर भी जोर दिया।

भारत ने दोहराया अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद में कहा, "नेविगेशन (समुद्री आवाजाही) के अधिकारों पर जबरदस्ती, धमकियों, गैर-कानूनी प्रतिबंधों या मनमाने दखल का असर नहीं पड़ना चाहिए।" उन्होंने कहा, भारत एक प्रमुख समुद्री देश है और हम एक ऐसे समुद्री क्षेत्र का पुरजोर समर्थन करते हैं जो आजाद, खुला, सुरक्षित और नियमों पर आधारित हो।

हरीश ने बहरीन की ओर से बुलाई गई परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में बात की। यह बैठक 'आरिया-फॉर्मूला' के तहत समुद्री सुरक्षा माहौल पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी। इसका नाम वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो आरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1992 में इस संस्था की अध्यक्षता करते हुए ऐसी बैठकों की शुरुआत की थी।

खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है वैश्विक असर

होर्मुज जलडमरूमध्य के ब्लॉक होने से भारत को आर्थिक नुकसान भी हुआ है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई और वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम की कीमतों में भारी उछाल आया।

हरीश ने कहा कि खाड़ी और पश्चिम एशिया में आई रुकावटों का "ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मामले में दुनिया भर के क्षेत्रों पर असर पड़ता है।"

होर्मुज और लाल सागर के तनाव पर जताई चिंता

उन्होंने उन घटनाओं या हमलों में शामिल पक्षों का नाम नहीं लिया, जिनमें ईरान और अमेरिका के साथ-साथ अन्य खाड़ी देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए टकराव के दौरान भारत को भी नुकसान उठाना पड़ा।

भारत ने अपने नाविकों की मौत को लेकर ईरान और अमेरिका के सामने विरोध दर्ज कराया है, और तेहरान के सामने भारतीय-पंजीकृत जहाज पर हुए हमले का भी विरोध किया है।

इरान के हमलो में हुई थी भारतीय नाविक की मौत

अप्रैल में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की गनबोट्स ने भारतीय झंडे वाले दो टैंकरों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। जुलाई में संयुक्त अरब अमीरात में पंजीकृत दो जहाजों पर ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया था।

भारत ने नई दिल्ली में ईरानी राजनयिकों के सामने इन दोनों घटनाओं का विरोध किया। जून में, भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स (कार्यवाहक प्रमुख) को बुलाकर तीन भारतीय नाविकों की मौत पर विरोध दर्ज कराया, जब अमेरिका ने उनके पलाऊ-पंजीकृत जहाज पर हमला किया था।

भारत ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के तहत कर रहा निगरानी

हरीश ने कहा कि भारत अपनी नौसेना को तैनात करके इस क्षेत्र के अशांत समुद्री इलाकों में समुद्री सुरक्षा में योगदान दे रहा है। हरीश के अनुसार, सोमवार तक भारतीय सुरक्षा अभियानों की मदद से 449 से ज्यादा कमर्शियल जहाज (जिनमें लगभग 20.3 मिलियन टन कार्गो या 8.4 बिलियन डॉलर से ज्यादा मूल्य का तेल था) अदन की खाड़ी और लाल सागर से गुजरे।

लाल सागर में ये रुकावटें हूथी मिलिशिया द्वारा पैदा की जा रही हैं, जो ईरान से जुड़ा यमन का एक विद्रोही समूह है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए मार्च में पश्चिमी अरब सागर में 11 जहाजों के साथ 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' शुरू किया था।

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नाविकों की सुरक्षित वापसी पर दिया जोर

संघर्ष में शामिल दोनों पक्षों की नाकेबंदी के कारण सैकड़ों भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर फंसे हुए हैं।

उनके पक्ष में बात करते हुए हरीश ने कहा, नाविक हमारी सामूहिक कोशिशों के केंद्र में होने चाहिए। उनकी सुरक्षा, समय पर सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता, क्रू में बदलाव और स्वदेश वापसी के लिए प्रभावी आकस्मिक योजना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।

साइबर जोखिम से होने वाले खतरे का जिक्र

हरीश ने तकनीक के विकास से पैदा होने वाले नए खतरों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली उभरते खतरों से निपटने के बढ़ते महत्व को पहचानती है,

जिसमें बिना चालक दल वाले सिस्टम से हमले, साइबर जोखिम और नेविगेशन व संचार में बाधा डालना शामिल है। उन्होंने आगे कहा, इन चुनौतियों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, क्षमता निर्माण और तकनीक का जिम्मेदार उपयोग महत्वपूर्ण होगा।

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