Nashik MLC Election Narendra Darade Mahayuti: नासिक स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। 18 जून को होने वाले मतदान से पहले महायुति के खेमे में हलचल तेज है। निर्दलीय उम्मीदवार प्रसाद हीरे और गोकुल गीते ने महायुति के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को समर्थन देने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन मतपत्र पर उनके नाम बरकरार रहने से महायुति की चिंताएं कम नहीं हुई हैं।
आंकड़ों के लिहाज से नासिक जिले में महायुति के पास करीब 450 मतदाताओं का स्पष्ट बहुमत है, जिससे नरेंद्र दराडे की जीत का रास्ता साफ नजर आता है। हालांकि, विपक्ष के दांव-पेच और क्रॉस वोटिंग के डर से महायुति का खेमा पूरी तरह सतर्क है।
महायुति की घेराबंदी: क्रॉस वोटिंग के डर से महायुति ने अपने पार्षदों को ठाणे के पास एक सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है। इन सभी जनप्रतिनिधियों को सीधे मतदान के दिन ही नासिक लाया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार के राजनीतिक झटके से बचा जा सके। आधिकारिक उम्मीदवार न उतारने के महाविकास आघाडी ने हार नहीं मानी है। ठाकरे गुट के नेता वसंत गीते ने संकेत दिए हैं कि मविआ एक बावजूद अलग रणनीति पर काम कर रही है, जिसके तहत मतदाता मतपत्र पर मौजूद अन्य विकल्पों का रुख कर सकते हैं, नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त हो जाने के कारण, समर्थन मिलने के बावजूद मतपत्र पर प्रसाद हीरे और गोकुल गीते के नाम बने हुए हैं। यही तकनीकी स्थिति चुनाव को रोचक और अप्रत्याशित बना रही है।
नरेंद्र दराडे की उम्मीदवारी को लेकर महायुति के भीतर ही कुछ नेताओं में नाराजगी थी, जिसे मंत्री गिरीश महाजन, दादा भुसे और उदय सामंत की मध्यस्थता के बाद सुलझाने का दावा किया गया। लेकिन अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्थानीय स्तर पर मविआ की रणनीति महायुति के गणित को बिगाड़ पाएगी या नहीं। 18 जून को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि क्या नासिक के चुनावी रण में कोई बड़ा राजनीतिक संदेश निकलकर सामने आता है।
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क्रॉस वोटिंग का खतराः नासिक महायुति के अपने ही खेमे में कुछ नेताओं की नाराजगी और बागियों का मतपत्र पर नाम बना रहना डर का प्रमुख कारण है। पार्षदों को ठाणे ले जाना यह दर्शाता है कि गठबंधन अपने वोटों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। क्या निर्दलीय उम्मीदवार वास्तव में अपना समर्थन ट्रांसफर करवा पाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है।
अप्रत्यक्ष विरोध