अवैध साहूकारी मामले में कल्पना खरात को झटका; हाई कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत, पुलिस हिरासत का रास्ता साफ

Bombay HC On Kalpana Kharat Case: बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिर्डी के अवैध साहूकारी और जमीन हड़पने के मामले में आरोपी कल्पना खरात की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। पुलिस अब हिरासत में पूछताछ करेगी।
The Bombay High Court rejected the anticipatory bail of Kalpana Kharat in a Shirdi illegal moneylending & land fraud case, clearing the way for police custody.
कल्पना खरात, अशोक मामले (सोर्स - सोशल मिडिया)
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Nashik Kalpana Ashok Kharat Bail: नासिक शिर्डी पुलिस थाने में दर्ज धोखाधड़ी और अवैध साहूकारी के एक गंभीर मामले में आरोपी कल्पना अशोक खरात को बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने याचिकाकर्ता के दावों को खारिज करते हुए उसकी अग्रिम जमानत याचिका ठुकरा दी है।

इस फैसले के बाद अब पुलिस के लिए आरोपी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ का रास्ता साफ हो गया है। शिकायतकर्ता ने आरोपियों से 2 प्रतिशत मासिक ब्याज पर 3 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इस कर्ज के बदले सुरक्षा के नाम पर आरोपियों ने फरियादी की कृषि भूमि की रजिस्ट्री कल्पना खरात के नाम पर करवा ली थी।

अदालत की कड़ी टिप्पणी

फरियादी का आरोप है कि उसने कर्ज की मूल राशि और ब्याज का पूरा भुगतान समय पर कर दिया, बावजूद इसके आरोपियों ने उसकी जमीन वापस करने से इनकार कर दिया और धोखे से हड़प ली। गिरफ्तारी से बचने के लिए कल्पना खरात ने अदालत में दावा किया था कि वह इस मामले में निर्दोष है और मुख्य आरोपी की पत्नी होने के नाते उसे फंसाया गया है।

हालांकि, सरकारी पक्ष ने कोर्ट में ठोस सबूत पेश किए- जमीन की रजिस्ट्री पर खुद कल्पना खरात के हस्ताक्षर मौजूद है, बैंक खातों के रिकॉर्ड से स्पष्ट होता है कि आरोपी को इस अवैध साहूकारी के कारोबार की पूरी जानकारी थी और उसकी सक्रिय भूमिका थी।

अदालत ने खरात के दावों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उसने अदालत को गुमराह करने और तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इतने गंभीर आर्थिक अपराध की सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपी की पुलिस हिरासत में पूछताछ अत्यंत आवश्यक है।

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