नासिक MLC चुनाव: निर्विरोध जीत की उम्मीद खत्म, नामांकन वापसी के बाद अब नरेंद्र दराडे के लिए बढ़ी मुश्किलें

Nashik MLC Election: नासिक विधान परिषद सीट पर निर्विरोध जीत की उम्मीदें खत्म। प्रसाद हिरे और गोकुल गिते के मैदान में रहने से मतदान तय, महायुति उम्मीदवार नरेंद्र दराडे की बढ़ी चिंताएं।
Nashik MLC election heading for polls as unopposed hopes shatter. Mahayuti candidate Narendra Darade faces tough challenge after withdrawal deadline ends.
नासिक विधान परिषद, नरेंद्र दराडे ( (सोर्स- डिजाइन फोटो/ नवभारत)
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Nashik MLC Election Narendra Darade: नासिक स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद सीट के लिए महायुति के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को समर्थन तो मिल गया है, लेकिन चुनाव के निर्विरोध होने की उम्मीदें अब पूरी तरह खत्म हो गई हैं। नामांकन वापसी की मियाद बीत जाने के बाद अब मतदान होना निश्चित है, जिससे दराडे के लिए चुनावी राह आसान नहीं रह गई है।

निर्विरोध जीत की उम्मीदें खत्म, नेताओं का डेरा

भले ही आधिकारिक समर्थन की घोषणाएं हो गई हों, लेकिन इसके पीछे कुछ तकनीकी और राजनीतिक कारण दराडे की चिंता बढ़ा रहे हैं- प्रसाद हिरे और गोकुल गिते के नाम मतपत्र पर बरकरार रहने से चुनाव में मतदान अनिवार्य हो गया है। इससे दराडे को हर एक मत सुरक्षित करने के लिए अलग से मेहनत करनी पड़ेगी। स्थानीय गुटबाजी और व्यक्तिगत नाराजगी के चलते, आधिकारिक समर्थन के बावजूद कुछ मतों के बंटवारे की आशंका बनी हुई है। यदि समर्थन देने वाले उम्मीदवारों को भी कुछ वोट मिल जाते हैं, तो परिणाम पर असर पड़ सकता है। अब मतदान होना तय है, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों (नगरसेवकों और सदस्यों) का महत्व अचानक बढ़ गया है। हर मतदाता की नाराजगी दूर करना और उन्हें मतदान केंद्र तक लाना अब उम्मीदवारों की प्राथमिकता है।

महाजन-सामंत की कोशिशों का असर

इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाते हुए मंत्री गिरीश महाजन और उदय सामंत ने नासिक में डेरा डाल रखा है। उन्होंने प्रसाद हिरे को उम्मीदवारी वापस लेने के लिए राजी कर लिया है, जबकि गोकुल गिते के समर्थन का भी दावा किया गया है। इन नेताओं की लगातार कोशिशों से महायुति ने अपनी स्थिति मजबूत तो की है, लेकिन मतदान टल न सका।

बढ़ती 'सौदेबाजी' और राजनीतिक दबाव

चुनाव के मतदान तक खिंचने से स्थानीय स्तर पर सौदेबाजी की चर्चाओं को बल मिल गया है। जानकारों का मानना है कि इस स्थिति में जनप्रतिनिधियों का दबाव और अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। हर एक मत की कीमत अब बहुत अधिक हो गई है, जिससे महायुति के नेताओं को कोई भी जोखिम लेने से बचना पड़ रहा है।

हालांकि महाजन और सामंत ने समर्थन का चित्र काफी हद तक साफ कर दिया है, फिर भी परिणाम आने तक नरेंद्र दराडे की चिंता कम होती नजर नहीं आ रही। मतदान के दिन तक राजनीतिक सरगर्मियां और तेज होने की संभावना है।

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