डिजिटल अरेस्ट ठगी, (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नासिक

'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर साइबर ठगी, वरिष्ठ नागरिक बने निशाना, नासिक में करोड़ों का नुकसान

Nashik Digital Arrest Fraud: नासिक में साइबर ठगों द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर वरिष्ठ नागरिकों से करोड़ों की ठगी हुई है। 2025-26 में कई मामलों में बड़ा वित्तीय नुकसान दर्ज हुआ।

अंकिता पटेल

Nashik Cyber Fraud: आजकल जीवनभर मेहनत करके कमाई गई रकम बैंक में जमा कर सुरक्षित जीवन जीने वाले वरिष्ठ नागरिक साइबर ठगों के निशाने पर हैं। तकनीक से अपेक्षाकृत दूर रहने वाले ऐसे लोगों को गंभीर अपराधों में फंसाए जाने का डर दिखाकर उनका तथाकथित डिजिटल अरेस्ट किया जाता है और अंततः उनकी जमा-पूंजी लूट ली जाती है।

नासिक साइबर पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड के अनुसार ठगी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं-वर्ष 2025: इस दौरान डिजिटल अरेस्ट के कुल 12 मामले दर्ज किए गए थे। नुकसान (2025): इन मामलों में लगभग 24-25 लोगों से करीब 11 करोड़ १० लाख रुपये की ठगी की गई, वर्ष 2026: इस साल अब तक 4 नए मामले दर्ज हो चुके हैं। नुकसान (2026): अब तक करीब 1 करोड़ 97 लाख रुपये की चपत लगाई जा चुकी है।

ठगी का तरीका: वर्दी और फर्जी सेटअप का मायाजाल

साइबर अपराधी पीड़ित को मनोवैज्ञानिक रूय से पूरी तरह तोड़ देते हैं- राग खुद को पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और घर के बाहर सीबीआई होने का डर दिखाते हैं। दावा किया जाता है कि पीड़ित के सिम कार्ड का इस्तेमाल आतंकियों को धन उपलब्ध कराने के लिए हुआ है। वीडियो कॉल में हूबहू पुलिस स्टेशन या सीबीआई कार्यालय जैसा माहौल और वर्दीधारी अधिकारी दिखाए जाते हैं। पीड़ितों को डराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी शपथपत्र और असली जैसे दिखने वाले बैंक स्टेटमेट तैयार करवाए जाते हैं।

जांच में आने वाली प्रमुख तकनीकी बाधाएं

पुलिस के लिए इन अपराधियों तक पहुंचना कई कारणों से कठिन साबित हो रहा है ठग जिन वर्चुअल सिम कार्डों का उझयोग करते है, उनका रिकॉर्ड आसानी से नहीं मिलता, कंप्यूटर का आईपी एड्रेस अवसर मलेशिया, कंबोडिया या अन्य देशों का दिखाई देता है।

ठगी की रकम सामान्य नागरिकों के उन बैंक खातों में जाती है, जिन्हें ठगों ने मामूली लालच देकर हासिल किया होता है। अक्सर लोग ठगी होने के काफी समय बाद पुलिस के पास पहुंचते है, जिससे रकम रिकवर करना मुश्किल हो जाता है।

भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है, लोगों को घबराने के बजाय समय रहते पुलिस से संपर्क करना चाहिए, बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों को भी संदिग्ध लेन-देन और वर्चुअल सिम पर निगरानी रखनी होगी,

- नासिक, साइबर पुलिस स्टेशन, संजय घिसे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक

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