

Godavari River Pollution: नासिक दक्षिण गंगा मानी जाने वाली गोदावरी नदी के प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। आगामी सिंहस्थ कुंभ मेला अब कुछ ही समय दूर है, लेकिन नदी की वर्तमान स्थिति को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है, प्रदूषण की इसी गंभीर समस्या को लेकर पर्यावरण प्रेमियों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा दायर याचिका में नदी के। जल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता, जताई गई है- याचिकाकर्ताओं का कहना है कि गोदावरी का पानी इस कदर प्रदूषित हो चुका है कि यह मानवीय उपयोग और विशेषकर 'शाही स्नान' के लिए सुरक्षित नहीं है।
कोर्ट से मांग की गई है कि नदी के तट पर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगाए जाएं, जिन पर लिखा हो कि 'नदी का पानी स्नान के लिए योग्य नहीं है'। कुंभके दौरान लाखों लोग पवित्र डुबकी लगाने आते हैं। प्रदूषित जल श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
यह स्थिति प्रशासन के लिए अत्यंत नाजुक बन गई है-इस याचिका ने प्रशासन द्वारा सीवेज ट्रीटमेंट प्लाट और नदी स्वच्छता के लिए किए जा रहे दावों पर बढ़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
गोदावरी हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान है। यदि हम अपनी 'जीवनदायिनी नदी को स्वच्छ नहीं रख सकते, तो इसके लिए केवल शासन को दोष देना पर्याप्त नहीं है।
गोदावरी को बचाने के लिए आज केवल कानूनी लड़ाई की नहीं, बल्कि जन-भागीदारी और आत्म परीक्षण की भी आवश्यकता है।
अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कुंभमेले की दिव्यता पर प्रदूषण का साया भारी पड़ सकता है। बॉम्बे हाई कोर्ट इस याचिका पर क्या निर्णय सुनाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी है।