भाजपा बागी नेता (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

32 बागियों का निलंबन भाजपा को पड़ेगा भारी? नागपुर में आपस में भिड़े पार्टी के दिग्गज!

Nagpur NMC Election 2026: बीजेपी में अंदरूनी कलह चल रही है क्योंकि नेता 32 बागी नेताओं का सस्पेंशन रद्द करने पर बहस कर रहे हैं। वोटर लिस्ट में गलतियों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

प्रिया जैस

Nagpur BJP Rebels: नागपुर मनपा के आम चुनावों के लिए मतदान में अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी रणनीति स्पष्ट कर दी है। नेताओं के भाषणों को देखा जाए तो पार्टी इस बार पूरी तरह से ‘विकास के मुद्दे’ पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। भले ही पार्टी के स्टार प्रचारक केवल राज्य सरकार और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर जनता के बीच जा रहे हों लेकिन विकास को ही अपना एजेंडा बनाया हुआ है।

जबकि विपक्ष की ओर से मनपा में गत 19 साल में किए गए विकास का हिसाब मांगा जा रहा है। एक ओर जहां चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार है वहीं अब चुनाव को केवल कुछ दिन बचे होने के बीच 32 बागियों पर की गई निलंबन की कार्रवाई को लेकर पार्टी के भीतर ही नेताओं में टकराव शुरू हो गया है।

एक धड़ा जहां इन बागियों के घर वापसी की तैयारी में जुट गया है वहीं दूसरा धड़ा इन बागियों को सबक सिखाने पर अड़ा हुआ है। इस टकराव के बीच जल्द ही इन बागियों की घर वापसी होने की संभावना पार्टी के कुछ नेताओं ने जताई है।

नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की कवायद

बताया जाता है कि हाल ही में 32 कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकाले जाने के बाद अंतिम छोर के कार्यकर्ताओं में कुछ नाराजगी के स्वर हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि पार्टी ने कांग्रेस से लाए गए कुछ कार्यकर्ताओं को टिकट दिया है। ऐसे में यदि वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं ने बगावत कर चुनावी झंडा हाथ में लिया हो तो इसमें गलत क्या है। कार्यकर्ताओं की पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर उपजी नाराजगी पर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। सूत्रों के अनुसार 151 सीटों के लिए लगभग 5000 से अधिक कार्यकर्ताओं ने टिकट की मांग की थी जिसके कारण कई योग्य कार्यकर्ताओं के साथ ‘अन्याय’ भी हुआ। भाजपा ने अनुशासनहीनता के चलते 32 कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकाल दिया था लेकिन अब उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

मान गए 90 प्रश बागी

पार्टी का दावा है कि 90 प्रतिशत बागियों को समझाने में सफलता मिली है और शेष कार्यकर्ताओं को भी अगले 2-4 दिनों में समझा-बुझाकर वापस उनके स्थान पर लाने का काम किया जाएगा। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उनके पास न तो कोई विजन है और न ही वे आने वाले समय की कोई योजना पेश कर पा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि जनता को पता है कि विकास किसने किया है और इसी आधार पर 15 तारीख को होने वाले मतदान में भाजपा को भारी समर्थन मिलेगा।

मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर जताई चिंता

चुनावों में गिरते मतदान प्रतिशत पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है। कुछ राजनीतिकों का कहना है कि मतदाता सूची में भारी पैमाने पर त्रुटियां हैं जिसमें मृत व्यक्तियों के नाम और एक ही व्यक्ति के कई जगहों पर नाम दर्ज होना शामिल है।

जब तक मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट नहीं किया जाता तब तक मतदान का प्रतिशत बढ़ाना चुनौतीपूर्ण होगा। वर्तमान में जहां 60-65 प्रतिशत मतदान हो रहा है उसे सही सूची के माध्यम से 80-85 प्रतिशत तक ले जाया जा सकता है।

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