एमआईडीसी हिंगना में बना पहला पशु दहन घाट (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
नागपुर

एमआईडीसी हिंगना में बना पहला पशु दहन घाट, 30000 वर्ग फुट में सुविधा

MIDC Hingna animal cremation : नागपुर के एमआईडीसी हिंगना में ‘राइज फॉर टेल्स’ द्वारा शहर का पहला पशु दहन घाट शुरू हो गया है। 30,000 वर्ग फुट में इलेक्ट्रिक श्मशान, हाइड्रोथेरेपी यूनिट और शिक्षा कार्यक

आंचल लोखंडे

Nagpur Animal Crematorium: नागपुर महानगर पालिका (एनएमसी) शहर में पशु श्मशान घाट स्थापित करने में वर्षों से नाकाम रही है। कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन वे धरातल पर उतर नहीं सकीं। इसी कमी को पूरा करने के लिए एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) आगे आया है। ‘राइज फॉर टेल्स’ नामक एनजीओ, जो पशु बचाव और पुनर्वास कार्यों के लिए जाना जाता है, 16 नवंबर को एमआईडीसी हिंगना में 30,000 वर्ग फुट क्षेत्र में नागपुर का पहला समर्पित पशु श्मशान घाट शुरू करेगा।

यह इलेक्ट्रिक श्मशान घाट नाममात्र दान-आधारित मॉडल पर संचालित होगा। इस पहल की प्रेरणा एनजीओ के संस्थापक वैरागड़े परिवार की निजी क्षति से मिली। भारी बारिश के दौरान उनके पालतू कुत्ते ‘कोको’ की मृत्यु होने पर परिवार को उचित दफन स्थल खोजने में काफी कठिनाई हुई। इस अनुभव से उन्हें एहसास हुआ कि हजारों पालतू पशु मालिक भी ऐसी ही समस्या का सामना करते हैं। इसी स्मृति में यह श्मशान घाट स्थापित किया जा रहा है।

‘राइज फॉर टेल्स’ दो और महत्वपूर्ण पहल

गार्गी वैरागड़े ने बताया कि श्मशान घाट के साथ ‘राइज फॉर टेल्स’ दो और महत्वपूर्ण पहल शुरू कर रहा है। पशु हाइड्रोथेरेपी यूनिट, ‘सहजीवन’ नामक मानवीय शिक्षा कार्यक्रम।हाइड्रोथेरेपी यूनिट घायल, लकवाग्रस्त, या सर्जरी के बाद ठीक हो रहे जानवरों की मदद करेगी। श्मशान घाट, हाइड्रोथेरेपी यूनिट और ‘सहजीवन’ का शुभारंभ नागपुर के पशु कल्याण तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

‘सहजीवन’ कार्यक्रम

‘सहजीवन’ कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली बच्चों में सामुदायिक जानवरों के साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व और करुणा की भावना विकसित करना है। पिछले पाँच वर्षों में एनजीओ ने 10,000 से अधिक जानवरों को बचाया और उनका उपचार किया है, साथ ही 5,000 से अधिक नसबंदी सर्जरी भी कराई हैं। ‘एबीसी’ कार्यक्रम के तहत नसबंदी किए गए हर पशु को रेबीज-रोधी टीका लगाया जाता है।

उल्लेखनीय है कि एनएमसी ने 2012 में ही भांडेवाड़ी में एक पशु भस्मक लगाने की योजना बनाई थी। आयुक्त ने 5 करोड़ रुपये की आधुनिक सुविधा को मंजूरी भी दी थी, जो प्रति घंटे 500 किलो शव भस्म करने में सक्षम होती। हालांकि, यह योजना आज तक केवल कागजों में ही अटकी हुई है।

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