DJ, लेजर लाइट, आतिशबाजी बैन प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
नागपुर

नागपुर हाई कोर्ट का फैसला: DJ, लेजर लाइट और आतिशबाजी पर पूर्ण बैन, उल्लंघन पर पुलिस अफसर होंगे जिम्मेदार

Nagpur Bench DJ Ban: नागपुर में त्योहारों व जुलूसों के दौरान तेज डीजे साउंड, लेजर लाइट और पटाखों पर हाई कोर्ट ने पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। लापरवाही पर शीर्ष पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

प्रमोद यादव

Bombay High Court Nagpur Bench Noise Pollution: नागपुर जिलें में त्योहारों और जुलूसों के दौरान सार्वजनिक सड़कों पर डीजे के शोर, लेजर-बीम लाइट और आतिशबाजी से होने वाले ध्वनि व वायु प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाते हुए न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे ने सार्वजनिक स्थलों पर डीजे, साउंड सिस्टम, लेजर-बीम लाइट और पटाखों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो सीधे पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त और संबंधित कनिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी करने का आदेश भी दिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हाई कोर्ट की अन्य बेंच द्वारा ध्वनि प्रदूषण पर ली गई सख्त भूमिका का उल्लेख करते हुए नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए, अदालत ने डीजे मालिकों और आयोजक मंडलों के खिलाफ सीधी कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए कहा कि इस मामले में किसी प्रकार का भ्रम या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्वास्थ्य को भारी नुकसान, बच्चे ने गंवाई सुनने की क्षमता

नागपुर खण्ड पीठ अदालत ने कहा कि जुलूसों में इस्तेमाल होने वाली तीव्र लेजर और हाई-इंटेंसिटी बीम लाइट से नागरिकों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। मामले की सुनवाई में यह दर्दनाक तथ्य सामने आया कि डीजे के अत्यधिक शोर के कारण एक बच्चे को अपने कान की सुनने की क्षमता गंवानी पड़ी, वहीं तेज लेजर बीम के कारण कई लोगों की आंखों को क्षति पहुंची है।

न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे ने कहा कि कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ हर नागरिक को ध्वनि व वायु प्रदूषण रोकने के लिए अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

अथर्व खडसे ने रात 10 बजे के बाद निर्माण कार्य पर रोक की मांग

नागपुर जिला के रामनगर स्थित बाजीप्रभु नगर निवासी एडवोकेट अथर्व खडसे ने एक मध्यस्थता आवेदन दायर किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक कंस्ट्रक्शन कंपनी रात 10 बजे के बाद भी भारी मशीनरी, ड्रिलिंग मशीन, कंक्रीट मिक्सर और कटर का इस्तेमाल कर रही है, जिससे निवासियों की नींद खराब हो रही है और स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है।

उन्होंने अदालत को बताया कि स्थानीय पुलिस से शिकायत करने पर 112 पर कॉल करने की बात कहकर मामला टाल दिया जाता है और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। मध्यस्थ की ओर से अधि। आनंद पुरचुरे, याचिकाकर्ताओं की ओर से अधि. आशुतोष धर्माधिकारी व अधि। तुषार मंडलेकर, अदालत मित्र अधि। अब्दुल सुभान तथा केंद्र व राज्य सरकार की ओर से अधि। कार्तिक शुकुल, अधि। शिशिर उके और अधि. नितिन राव ने पैरवी की।

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