

Maharashtra Co operative Societies Rules: महाराष्ट्र सहकारी समिति नियम, 2014 और सहकारिता कानून में वर्ष 2026 में किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली पूर्व मंत्री व विधायक बच्चू कड़ की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का समय देते हुए 30 सितंबर को अंतिम सुनवाई करने के संकेत दिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि 30 सितंबर को ही इस याचिका का अंतिम निपटारा किया जाएगा। महाराष्ट्र सहकारी समिति नियमों के तहत राज्य की सभी सहकारी संस्थाओं को उनके स्वरूप और आकार के आधार पर चार श्रेणियों (अ, ब, क और ड) में बांटा गया है।
वर्ष 2026 में सहकारिता कानून में किए गए नए संशोधनों के तहत 'अ' वर्ग की संस्थाओं के लिए नियम अत्यधिक सख्त कर दिए गए हैं। इन कड़े प्रावधानों के चलते जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक मंडल को प्रशासक के तौर पर कार्यभार संभालने की अनुमति नहीं है।
दूसरी ओर, सरकार ने 'ब' और 'क' वर्ग की संस्थाओं को इस नियम से छूट दी है। विधायक बच्चू कडू ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मांग की है कि 'ब' और 'क' वर्ग की तरह ही जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को भी इस नियम से छूट दी जाए और इसके लिए कानून में आवश्यक संशोधन के निर्देश जारी किए जाएं।
बच्चू कड़ की यह याचिका मुख्य रूप से अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक से जुड़ी है। मौजूदा संशोधन के कारण बैंक के संचालक मंडल के हाथ बंधे हुए हैं और वे प्रशासक के रूप में काम नहीं कर पा रहे हैं।
यदि 30 सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट से याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला आता है तो बच्चू कड़ और उनके संचालक मंडल को बैंक में बड़े वित्तीय और नीतिगत फैसले लेने के अधिकार दोबारा मिल सकेंगे, सहकारिता क्षेत्र की नजरें अब 30 सितंबर को आने वाले हाई कोर्ट के आदेश पर टिकी हैं।