

IAS Officer High Court Strictures: नागपुर के महल दंगा मामले में की गई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 'बुलडोजर फैसले' को लेकर नागपुर महानगरपालिका (मनपा) के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अनभिज्ञता जताए जाने पर अदालत ने गहरा आश्चर्य और तीखी नाराजगी व्यक्त की है। पीठ ने अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैये को सिरे से खारिज कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस महत्वपूर्ण दिशानिर्देश की जानकारी आज देश के एक आम नागरिक तक को है। ऐसे में कानून और शीर्ष अदालत के आदेशों से अनभिज्ञता का दावा करने वाले मनपा अधिकारियों में एक जिम्मेदार आईएएस (IAS) अधिकारी का शामिल होना बेहद आश्चर्यजनक और चिंताजनक है।
हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित मनपा अधिकारियों को 4 सितंबर से पहले अपने-अपने अलग-अलग शपथपत्र (Affidavit) दाखिल करने के कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अधिकारियों को इस शपथपत्र के जरिए यह बताना होगा कि वे अपने पिछले स्पष्टीकरण पर कायम हैं या फिर अपनी स्थिति में कोई बदलाव या सफाई देना चाहते हैं।
महल इलाके में हुई इस बुलडोजर कार्रवाई के बाद कानूनी प्रक्रिया का सही पालन न होने के आरोप लगे थे। अब हाई कोर्ट के इस कड़े रुख और व्यक्तिगत रूप से हलफनामा मांगने के आदेश के बाद नागपुर महानगरपालिका प्रशासन में हड़कंप मच गया है। 4 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे नागपुर शहर की नजरें टिकी हैं।