

Highlights
विदेश के इन देशों में खास तरीके से मनायी जाती है दिवाली
नेपाल में निभायी जाती है 5 दिनों तक अनोखी तिहार परंपरा
थाईलैंड में बहते दीयों के साथ मनाते हैं ये त्योहार
इंडोनेशिया की विश्व प्रसिद्ध भव्य रामलीला का होता है मंचन
अमेरिका के व्हाइट हाउस में होने लगा है दीपोत्सव
Diwali Celebrations at International Level: आज दिवाली का त्योहार मनाया जा रहा है। दिवाली यानी रोशनी का त्योहार अब सिर्फ भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। आज यह एक ऐसा ग्लोबल फेस्टिवल बन चुका है, जिसकी गूंज और चमक पूरी दुनिया में दिखाई देती है। 'अंधेरे पर उजाले की जीत' का संदेश देने वाला यह पावन पर्व दुनिया के कोने-कोने में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। जिन देशों में भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं, वहां तो इस दिन बाकायदा सरकारी छुट्टी होती है।
हर देश में दिवाली को मनाने का अपना एक खास और अनोखा अंदाज है। नाम और तौर-तरीके भले ही बदल जाते हों, लेकिन हर जगह इसका मूल संदेश एक ही रहता है..आपसी प्रेम, शांति और भाईचारा। तो दिवाली 2026 के मौके पर आइए जानने की कोशिश करते हैं कि भारत के अलावा दुनिया के कौन-कौन से देशों में यह त्योहार किस अनोखे अंदाज के साथ मनाया जाता है।
भारत के सबसे करीबी पड़ोसी देश नेपाल में दिवाली को 'तिहार' या 'स्वंती' के नाम से जाना जाता है। नेपाल में यह उत्सव पूरे 5 दिनों तक बेहद धूमधाम से चलता है। इस त्योहार की सबसे अनोखी बात इसका दूसरा दिन है, जिसे 'कुकुर तिहार' कहा जाता है।
इस खास दिन पर इंसानों के सबसे सच्चे और वफादार साथी यानी कुत्तों की विशेष पूजा की जाती है। लोग कुत्तों को फूलों की सुंदर माला पहनाते हैं, उनके माथे पर लाल तिलक लगाते हैं और उन्हें उनका मनपसंद स्वादिष्ट भोजन खिलाते हैं। कहते हैं कि नेपाली मान्यता के अनुसार कुत्तों को यमराज का दूत माना जाता है। इसके अलावा तिहार के दौरान गाय और कौवों की भी पूजा की जाती है, जबकि आखिरी दिन भाई-टीका के साथ समाप्त होता है।
पहले दिन काग तिहार: इस दिन यमराज के संदेशवाहक माने जाने वाले कौवों को खीर और मिठाई खिलाई जाती है।
दूसरे दिन कुकुर तिहार: इस दिन कुत्तों की पूजा होती है। उन्हें तिलक लगाकर, फूलों की माला पहनाई जाती है और स्वादिष्ट भोजन कराया जाता है, क्योंकि इन्हें यमराज का रक्षक माना जाता है।
तीसरे दिन गाई तिहार और लक्ष्मी पूजा: इस दिन धन की देवी लक्ष्मी के साथ-साथ गाय की पूजा की जाती है, क्योंकि गाय को लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। इसी दिन मुख्य दिवाली मनाई जाती है।
चौथे दिन गोवर्धन पूजा: इस दिन गोवर्धन पर्वत और बैलों की पूजा की जाती है।
पांचवें दिन भाई टीका: यह अंतिम दिन भाई-बहन के अटूट रिश्ते और प्रेम को समर्पित होता है, जिसमें बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं।
थाईलैंड में दिवाली के आसपास ही एक बेहद खूबसूरत और जादुई त्योहार मनाया जाता है, जिसे लोग 'लॉय क्रॉथोंग' या 'लवक क्रियोंग' कहते हैं। हालांकि यह भारत की पारंपरिक दिवाली से थोड़ा अलग है, लेकिन इसकी भावना बिल्कुल दीपोत्सव जैसी ही होती है। इस दिन थाईलैंड के लोग केले के पत्तों का इस्तेमाल करके छोटी-छोटी सुंदर नावें बनाते हैं। इन नावों को ताजे फूलों, मोमबत्तियों, अगरबत्तियों और सिक्कों से सजाया जाता है। शाम होते ही लोग इन तैरते हुए दीयों को नदियों, झीलों और तालाबों में बहा देते हैं। पानी पर तैरते हजारों टिमटिमाते दीये रात के अंधेरे को खूबसूरत बना देते हैं। थाई लोगों का मानना है कि ऐसा करने से जीवन के सारे दुख-दर्द पानी में बह जाते हैं।
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन इसके बावजूद यहां भारतीय संस्कृति और रामायण का बहुत गहरा असर देखने को मिलता है। इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर रहने वाला हिंदू समाज दिवाली के पर्व को बहुत ही भव्य तरीके से मनाता है। इंडोनेशियाई दिवाली की सबसे बड़ी खासियत यहां आयोजित होने वाली कलात्मक 'रामलीला' है। इस रामलीला को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। दिवाली के दिन लोग अपने घरों में दीये जलाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाते हैं। रामायण के पात्रों के प्रति यहां के लोगों का सम्मान देखते ही बनता है, जो इस जश्न में चार चांद लगा देता है।
मलेशिया में दिवाली को 'हरि दिवाली' के नाम से जाना जाता है और इस दिन पूरे देश में राष्ट्रीय अवकाश रहता है। मलेशियाई परंपरा के अनुसार, इस पर्व के दिन सुबह की शुरुआत एक खास और पवित्र 'तेल स्नान' (Oil Bath) से की जाती है। नहाने के बाद लोग साफ-सुथरे कपड़े पहनकर भगवान के दर्शन करने मंदिरों में जाते हैं।
इसके साथ ही साथ मलेशिया में इस अवसर पर 'ओपन हाउस' की एक बहुत ही प्यारी और अनूठी परंपरा है। इसमें हिंदू परिवार अपने घर के दरवाजे हर धर्म, जाति और समुदाय के दोस्तों और पड़ोसियों के लिए खोल देते हैं। सभी लोग मिलकर स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजनों और मिठाइयों का लुफ्त उठाते हैं।
अफ्रीका महाद्वीप के पास बसे खूबसूरत द्वीप देश मॉरीशस की लगभग आधी आबादी भारतीय मूल की है। यही वजह है कि मॉरीशस में दिवाली बिल्कुल भारत की तरह ही बड़े स्तर पर मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था।
मॉरीशस के लोग हफ्ते भर पहले से ही अपने घरों की सफाई और सजावट में जुट जाते हैं। शाम को मिट्टी के पारंपरिक दीयों से पूरा घर रोशन किया जाता है। इसके अलावा गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे कैरिबियाई देशों में भी भारतीय मूल के लोग लोक नृत्यों, पारंपरिक गीतों और रोशनी के साथ दिवाली का जश्न मनाते हैं।
अमेरिका और ब्रिटेन जैसे बड़े पश्चिमी देशों में भी अब दिवाली की चमक साफ दिखाई देने लगी है। अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में स्थित 'व्हाइट हाउस' में हर साल अमेरिकी राष्ट्रपति खुद दिवाली का दीया जलाकर इस पर्व की शुरुआत करते हैं। इतना ही नहीं, न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों के स्कूलों में दिवाली की आधिकारिक छुट्टी भी दी जाने लगी है।
दूसरी तरफ, ब्रिटेन के लीसेस्टर शहर में भारत के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा दिवाली उत्सव आयोजित किया जाता है। इस दिन हजारों लोग सड़कों पर उतरकर खूबसूरत आतिशबाजी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जगमगाती रोशनी का पूरा आनंद लेते हैं।
दिवाली का यह खूबसूरत त्योहार आज हर सीमा को पार कर चुका है। अलग-अलग देशों में भले ही इसके नाम, रीती-रिवाज और मनाने के तरीके बदल जाते हों, लेकिन हर जगह इसका मूल उद्देश्य एक ही रहता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि हम अपने दिल और समाज से हर तरह की नफरत और अंधेरे को खत्म करें और चारों तरफ प्रेम, भाईचारे और शांति का उजाला फैलाएं।