Type 1 Diabetes Children Cases Mumbai: बच्चों में तेजी से बढ़ रही टाइप-1 डायबिटीज स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में तीन लाख से अधिक बच्चे इस बीमारी के साथ जीवन जी रहे हैं, जबकि हर वर्ष करीब 19 हजार नए मामलों की पहचान हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर इलाज से इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
मुंबई शहर के वाडिया अस्पताल में वर्तमान में 1,300 से अधिक टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों का उपचार चल रहा है। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, लगभग हर पांचवें दिन एक नए बाल मरीज में इस बीमारी की पुष्टि हो रही है। इससे स्पष्ट है कि बच्चों में इस रोग के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
विशेषज्ञ डॉ. सुधा राव के अनुसार, टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इस स्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) अग्न्याशय (पैंक्रियास) की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला कर देती है। इसके कारण शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता और रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ने लगता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि टाइप-1 डायबिटीज का स्थायी इलाज फिलहाल उपलब्ध नहीं है, लेकिन समय पर पहचान, नियमित इंसुलिन थेरेपी, संतुलित आहार और लगातार ब्लड शुगर की निगरानी से बच्चे सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चे में अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, तेजी से वजन घटना या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।