संजय राउत का एकनाथ शिंदे पर गंभीर आरोप (फोटो क्रेडिट-X) 
मुंबई

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव नहीं हैं बागी सांसद, राउत बोले- मुझे भी तोड़ने की कोशिश कर चुके हैं एकनाथ शिंदे!

Sanjay Raut Slams Rebel MPs Eknath Shinde: शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत का बड़ा दावा, एकनाथ शिंदे ने उन्हें भी तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वे पार्टी के प्रति वफादार रहे।

अनिल सिंह

Sanjay Raut Slams Rebel MPs: महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के पाला बदलने के बाद शुरू हुआ वाकयुद्ध अब अपने चरम पर पहुंच गया है। उद्धव ठाकरे गुट के बागी सांसद संजय दीना पाटिल के गढ़ (भांडुप और विक्रोली) का दौरा करने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक बड़ा और सनसनीखेज राजनीतिक विस्फोट किया है। संजय राउत ने दावा किया है कि एकनाथ शिंदे कभी उनके बेहद अच्छे दोस्त हुआ करते थे और उन्होंने शिवसेना को तोड़ते समय खुद राउत से भी पार्टी छोड़ने के लिए संपर्क किया था।

राउत ने कहा कि शिंदे ने उन्हें भी अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन वे बाल ठाकरे और उद्धव ठाकरे के विचारों के प्रति पूरी तरह वफादार रहे और उन्होंने इस ऑफर को लात मार दी।

वे बागी नहीं गद्दार हैं, बगावत तो भगत सिंह और राजगुरु ने देश के लिए की थी

पाला बदलने वाले सांसदों को 'बागी' कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए संजय राउत ने कहा, "हम उन्हें बागी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर 'गद्दार' कहते हैं। बगावत शब्द का एक गौरवशाली इतिहास है। देश की आजादी के लिए शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारी बागी बने थे। उनका मकसद देश हित था। लेकिन हमारी पार्टी के सिंबल पर चुनकर दूसरी तरफ जाने वाले लोग बागी नहीं, बल्कि लालची हैं। इन नेताओं ने खुद को नीलामी (ऑक्शन) के लिए बाजार में खड़ा कर दिया, जहां इनकी कीमत तय हुई और इन्हें 50 से 60 करोड़ रुपये में खरीद लिया गया।"

ईडी और सीबीआई के डर से पार्टी छोड़कर भागे एकनाथ शिंदे

शिवसेना के नेता अक्सर पार्टी में फूट के लिए संजय राउत को ही जिम्मेदार ठहराते हैं। इस पर पलटवार करते हुए राउत ने कहा, "पार्टी के गद्दार बार-बार मुझ पर निशाना इसलिए साधते हैं क्योंकि मैं मातोश्री और ठाकरे परिवार के प्रति पूरी तरह वफादार हूं। जब एकनाथ शिंदे शिवसेना तोड़ रहे थे, तब मैंने व्यक्तिगत तौर पर उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की थी। लेकिन वे प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के डर से कांप रहे थे। जांच एजेंसियों के इसी खौफ के कारण शिंदे पार्टी छोड़कर चले गए और आज वे सत्ता की मलाई खा रहे हैं।"

नेता बिके हैं, शिवसैनिक और वोटर नहीं

संजय राउत ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि भले ही कुछ स्वार्थी सांसद और विधायक बिक गए हों, लेकिन शिवसेना का जमीनी कार्यकर्ता, वफादार शिवसैनिक और आम मतदाता आज भी उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा, "मुंबई के भांडुप और विक्रोली में जनता ने दिखा दिया कि वे गद्दारों के साथ नहीं हैं। अब जनता से सीधा संवाद साधने के लिए उद्धव ठाकरे खुद मैदान में उतर रहे हैं। अगले तीन से चार दिनों के भीतर हम यवतमाल, वाशिम, हिंगोली, परभणी, धाराशिव और शिरडी जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों का तूफानी दौरा करेंगे। गद्दारों को उनकी असली जगह अब महाराष्ट्र की जनता ही दिखाएगी।"

प्रवेश वर्मा मंत्री हैं या गुंडे? हुसैन दलवई का पीएम मोदी से सवाल, क्या मंत्री को बर्खास्त करेगी भाजपा?

ज्ञानेश कुमार तो जाएंगे...बेला एस्टेट में 729 में से बचा महज 1 वोटर, चुनाव आयोग पर भड़के राहुल गांधी

ट्रैफिक चालान नहीं भरा तो क्या कटेगी बिजली? सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये सुझाव

Fatehpur House Collapse: संदिग्ध सिलेंडर ब्लास्ट के बाद दो मंजिला मकान ढहा, 4 लोगों की दर्दनाक मौत

मास्को में गरजे प्रो. धीरज सिंह: बोले- वैश्विक शासन को दिशा दिखा रहा है भारतीय लोकतंत्र और नागरिक समाज