Mumbai Pune Expressway Missing Link Project (फोटो क्रेडिट-X) 
मुंबई

32 घंटे के जाम ने हिलाई सरकार, शिंदे ने 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट को मई 2026 तक पूरा करने का दिया अल्टीमेटम

Mumbai Pune Expressway Missing Link Project: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भीषण जाम के बाद शिंदे ने 'मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट' को मई 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया है। यह घाट सेक्शन को बायपास करेगा।

अनिल सिंह

Eknath Shinde On Missing Link Project: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर मंगलवार को हुए एक टैंकर हादसे के बाद लगे 32 घंटे लंबे जाम ने महाराष्ट्र प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस भीषण ट्रैफिक संकट, जिसने हजारों यात्रियों को भूखे-प्यासे सड़कों पर रहने को मजबूर किया, के बाद अब उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बहुप्रतीक्षित 'मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट' (Missing Link Project) को युद्धस्तर पर पूरा करने का निर्देश दिया है। राज ठाकरे सहित कई विपक्षी नेताओं द्वारा सरकार की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली पर सवाल उठाने के बाद, एमएसआरडीसी (MSRDC) ने अब मई 2026 की नई समयसीमा तय की है।

यह प्रोजेक्ट न केवल यात्रा का समय कम करेगा, बल्कि लोनावला-खंडाला घाट के उस खतरनाक हिस्से को भी खत्म कर देगा जहाँ अक्सर भारी वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते हैं।

क्यों जरूरी है मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट?

वर्तमान में, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराना हाईवे खोपोली के पास 'अडौशी' से 'कुसगांव' (लोनावला) के बीच एक ही संकरे मार्ग पर मिल जाते हैं। यह 19.8 किलोमीटर का हिस्सा बेहद घुमावदार है और घाट क्षेत्र होने के कारण यहाँ अक्सर भूस्खलन और बड़े टैंकरों के पलटने की घटनाएं होती हैं।

मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट इस पूरे 'घाट' हिस्से को बायपास कर देगा। यह नया मार्ग खोपोली एग्जिट से शुरू होकर सीधे कुसगांव में निकलेगा, जिससे एक्सप्रेसवे की दूरी 6 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा का समय 25 से 30 मिनट तक घट जाएगा।

इंजीनियरिंग का अजूबा: सुरंगें और केबल-स्टे ब्रिज

6,600 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग की दृष्टि से दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। इसमें शामिल मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

जुड़वां सुरंगें: प्रोजेक्ट में दो विशाल सुरंगें बनाई जा रही हैं। पहली सुरंग 1.6 किमी और दूसरी 8.9 किमी लंबी है। उल्लेखनीय है कि 8.9 किमी वाली सुरंग दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंगों में से एक है (लगभग 23 मीटर चौड़ाई), जिसमें 10 लेन का प्रावधान है।

टाइगर वैली ब्रिज: घाट क्षेत्र की गहरी खाइयों को पार करने के लिए दो केबल-स्टे पुल बनाए गए हैं। इनमें से एक पुल टाइगर वैली के ऊपर है, जिसकी ऊँचाई जमीन से बहुत अधिक है और इसे भूकंपरोधी तकनीक से लैस किया गया है।

सड़क सुरक्षा: नया मार्ग सीधा और चौड़ा होने के कारण 'एस-कर्व' (S-Curve) और तीखे मोड़ों से छुटकारा मिलेगा, जो दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बनते हैं।

देरी का कारण और नई डेडलाइन

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2019 में हुई थी और इसे 2022 तक पूरा होना था। हालांकि, सह्याद्रि की कठिन पहाड़ियों में ड्रिलिंग, मानसून के दौरान भारी बारिश, कोविड-19 महामारी और टाइगर वैली में पुल निर्माण की जटिलताओं के कारण इसमें देरी हुई।

उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि अब किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एमएसआरडीसी के अनुसार, सुरंगों का खुदाई कार्य (Excavation) पूरा हो चुका है और अब केवल लाइनिंग और फिनिशिंग का काम चल रहा है। उम्मीद है कि मई 2026 तक इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

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