रेल ट्रैक (फोटो नवभारत)
मुंबई

Movable Track: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में नया प्रयोग, 320 किमी/घंटे की रफ्तार पर ऐसे बदलेगी ट्रेन की दिशा

Mumbai Ahmedabad Bullet Train: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में 320 किमी/घंटे की डिजाइन गति के लिए मूवेबल क्रॉसिंग और ड्यूल पॉइंट मशीन तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे सुरक्षित संचालन में मदद मिलेगी।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आलोक उमाकृष्ण

Movable Crossing Train Track: पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट कही जाने वाली मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से आकार ले रही है। देश का यह पहला हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर कई मायनों में अलग होने वाला है।

मुंबई-अहमदाबाद के बीच लगभग 508 किमी की दूरी तय करने वाली बुलेट ट्रेन जमीन के नीचे, जमीन के ऊपर और पानी के अंदर भी चलेगी।

रेलवे तकनीक में नया अध्याय

देश में रेलवे तकनीक के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। बुलेट ट्रेन परियोजना में पहली बार मूवेबल क्रॉसिंग (Movable Crossing) या स्विंग-नोज क्रॉसिंग (Swing-Nose Crossing) से युक्त हाई-स्पीड टर्नआउट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह तकनीक 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक की डिजाइन गति पर बुलेट ट्रेन के सुरक्षित और सुचारु संचालन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या है पारंपरिक रेलवे टर्नआउट?

उल्लेखनीय है कि पारंपरिक रेलवे टर्नआउट में फिक्स्ड क्रॉसिंग का इस्तेमाल होता है। इसमें क्रॉसिंग नोज पर एक निश्चित गैप मौजूद रहता है, जिसे ट्रेन के पहिए को पार करना पड़ता है। अधिक गति पर यह गैप पहिए और रेल के बीच डायनेमिक इम्पैक्ट पैदा कर सकता है। इससे कंपन, शोर और पहियों तथा रेल के विभिन्न हिस्सों में घिसाव बढ़ने की आशंका रहती है।

गैप खत्म करेगी मूवेबल क्रॉसिंग

मूवेबल क्रॉसिंग तकनीक में क्रॉसिंग नोज को स्विच रेल के साथ समन्वयित करते हुए भौतिक रूप से स्थानांतरित किया जाता है। इससे टर्नआउट के महत्वपूर्ण हिस्से में पहिए को लगातार और गैप-रहित रेल सतह मिलती है। इसका सीधा फायदा हाई-स्पीड ट्रेन के सुरक्षित व तेज संचालन में मिलता है।

लगातार रेल संपर्क से बुलेट ट्रेन की आवाजाही अधिक सुचारु होती है और डायनेमिक इम्पैक्ट कम होता है। इसके अलावा कंपन और कोच के भीतर शोर घटने से यात्रियों के सफर का आराम बढ़ता है। रेल और पहियों के घिसाव में कमी आने से परिसंपत्तियों की आयु और रखरखाव व्यवस्था में भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

दो पॉइंट मशीनें करेंगी टर्नआउट को नियंत्रित

हाई-स्पीड टर्नआउट की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए इसमें पहली बार ड्यूल पॉइंट मशीन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। पहली पॉइंट मशीन स्विच रेल को निर्धारित स्थिति में ले जाकर लॉक करती है, जबकि दूसरी मूवेबल क्रॉसिंग नोज को सही स्थिति में पहुंचाकर लॉक करती है।

दोनों मशीनें सिग्नलिंग इंटरलॉकिंग प्रणाली के तहत समन्वित तरीके से काम करती हैं। रूट सेट होने के बाद स्विच रेल और मूवेबल क्रॉसिंग की स्थिति की जांच की जाती है। दोनों के सही स्थान पर होने और सुरक्षित लॉकिंग की पुष्टि मिलने के बाद ही ट्रेन को टर्नआउट से गुजरने की अनुमति दी जाती है।

मिलीमीटर स्तर की सटीकता जरूरी

320 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति को ध्यान में रखते हुए हाई-स्पीड पॉइंट मशीनों में अत्यधिक सटीक पोजिशनिंग, मजबूत लॉकिंग मैकेनिज्म और उच्च एक्चुएशन फोर्स की आवश्यकता होती है। साथ ही तापमान, कंपन और विद्युत-चुंबकीय परिस्थितियों में विश्वसनीय संचालन भी जरूरी है।

स्विच रेल और मूवेबल क्रॉसिंग की अंतिम स्थिति तथा उनकी सुरक्षित लॉकिंग की स्वतंत्र रूप से निगरानी की जाती है। सभी जांच पूरी होने के बाद ही इंटरलॉकिंग ट्रेन के लिए रूट रिलीज करती है।

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