हाईकोर्ट के निर्देश पर 31 जुलाई 2026 को गठित हुई विशेषज्ञ समिति
झोपड़पट्टी पुनर्विकास कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा
प्रशासनिक और तकनीकी बाधाएं दूर करने पर जोर
10 महीने में सरकार को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
Mumbai Slum Redevelopment Maharashtra Housing Police SRA: महाराष्ट्र में झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक हुई। समिति अगले 10 महीनों में राज्य सरकार को अपनी विस्तृत सिफारिशें सौंपेगी।
विधायक पराग अलवाणी सहित वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने आम नागरिकों को पुनर्वसन योजनाओं का लाभ जल्द दिलाने के लिए सुझाव दिए। बैठक में झोपड़पट्टीवासियों को सम्मानजनक जीवन और बेहतर आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रक्रिया में जरूरी सुधारों पर भी मंथन हुआ।
महाराष्ट्र सरकार के गृह निर्माण विभाग ने 31 जुलाई 2026 को इस विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका के तहत दिए गए आदेशों के अनुपालन में उठाया गया।
अदालत ने महाराष्ट्र झोपड़पट्टी क्षेत्र (सुधार, उन्मूलन और पुनर्विकास) अधिनियम, 1971 के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रदर्शन ऑडिट करने और सुधारों के लिए सुझाव देने का निर्देश दिया था। समिति को विकासकों, भूमि मालिकों, सहकारी समितियों और कानूनी विशेषज्ञों के विचारों को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार करनी है।
बैठक में गृह निर्माण एवं नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता, झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (एसआरए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेंद्र कल्याणकर, पूर्व सांसद राहुल शेवाले, नगर रचना निदेशक जितेंद्र भोसले और वास्तुकार सलोनी देवचर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में पुनर्विकास परियोजनाओं के सामने आने वाली प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों को दूर करने तथा कामकाज में तेजी लाने के लिए नीतिगत बदलावों की जरूरत पर चर्चा हुई।
बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार, विशेषज्ञ समिति को अगले 10 महीनों के भीतर अपनी विस्तृत सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपनी हैं। समिति के काम में सहायता के लिए एसआरए के इंजीनियरिंग, वित्त, भूमि अधिग्रहण और नगर योजना विभागों के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक उपसमिति भी गठित की जाएगी।
अब समिति की सिफारिशों पर नजर रहेगी। इनसे पुनर्विकास प्रक्रिया की बाधाएं दूर करने, प्रशासनिक कामकाज में सुधार लाने और पात्र झोपड़पट्टीवासियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में आगे की कार्ययोजना तय होने की उम्मीद है।