कर्जमाफी का इंतजार करता महाराष्ट्र का किसान (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI) 
मुंबई

किसानों की कर्ज माफी पर फिर चला आचार संहिता का हथौड़ा, महाराष्ट्र के 'बलिराजा' में बढ़ा भारी असंतोष

Maharashtra Farmers Loan Waiver Code of Conduct Dispute: आचार संहिता के चलते महाराष्ट्र में 27,000 करोड़ की किसान कर्ज माफी योजना अटकी। खरीफ सीजन से पहले बलिराजा परेशान।

अनिल सिंह

Maharashtra Farmers Loan Waiver: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान सत्ताधारी महायुति के नेताओं ने किसानों की मुकम्मल कर्ज माफी को अपने घोषणापत्र का मुख्य बिंदु बनाया था। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सार्वजनिक मंचों से संकेत भी दिए थे कि जून 2026 के अंत तक इस योजना को कैबिनेट की मंजूरी देकर लागू कर दिया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस योजना से राज्य के करीब 35 से 40 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलना प्रस्तावित है, जिससे सरकारी खजाने पर लगभग 27,000 करोड़ का भारी-भरकम वित्तीय बोझ पड़ेगा।

लेकिन हकीकत के धरातल पर सरकार की निर्णय लेने की कछुआ चाल के आड़े एक बार फिर चुनाव आचार संहिता आ गई है। इससे पहले बारामती और राहुरी के स्थानीय चुनावों के चलते 6 मई तक आचार संहिता प्रभावी थी। वह अवधि खत्म होते ही अब 18 मई से शुरू हो रहे विधान परिषद की 17 सीटों के द्विवार्षिक चुनावों की आचार संहिता ने सरकार को बड़े नीतिगत फैसलों से पीछे हटने का एक और मौका दे दिया है।

विपक्ष के आरोपों और राजनैतिक लाभ का डर

प्रशासनिक विशेषज्ञों और राजनैतिक विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि यह चुनाव आम मतदाताओं का नहीं है, बल्कि इसमें केवल स्थानीय स्वशासन निकायों (नगर निगमों, जिला परिषदों) के निर्वाचित प्रतिनिधि ही वोट डालेंगे। इसलिए तकनीकी और कानूनी रूप से कैबिनेट को इतनी बड़ी किसान कल्याणकारी योजना की घोषणा करने से कोई भी नियम नहीं रोकता। हालांकि, मंत्रालय के भीतर यह चर्चा आम है कि सरकार इस डर से कदम पीछे खींच रही है कि चुनाव के दौरान ऐसी बड़ी घोषणा करने पर विपक्ष उन पर वोट बैंक की राजनीति और आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाकर मामले को कोर्ट में न खींच ले।

खरीफ सीजन के मुहाने पर खड़ा लाचार किसान

सरकार के इस रक्षात्मक और टालमटोल वाले रवैये के कारण ग्रामीण इलाकों में भारी जनाक्रोश पनप रहा है। खरीफ का नया कृषि सीजन बिल्कुल नजदीक आ चुका है और मानसून की दस्तक से पहले किसानों को नए सिरे से जुताई, उन्नत बीज, रासायनिक खाद और कीटनाशकों की खरीद के लिए नकद धन की सख्त जरूरत है। जब तक पुराना भूर्ज (कर्ज) खातों से साफ नहीं होता, तब तक राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैंक किसानों को नया फसल ऋण देने से साफ मना कर रहे हैं।

राजनैतिक समीकरणों में हाशिए पर 'बलिराजा'

किसान संगठनों ने तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि राजनेताओं के लिए महाराष्ट्र के किसान केवल चुनाव के समय वोट बटोरने का जरिया मात्र बनकर रह गए हैं। चुनाव आते ही मंचों से बड़े-बड़े लोकलुभावन वादे किए जाते हैं, और जैसे ही सत्ता हाथ में आती है, वैसे ही तकनीकी बारीकियों और आचार संहिता का ढाल बनाकर फैसलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यदि जून के पहले सप्ताह तक सरकार ने इस गतिरोध को तोड़कर किसानों के खातों में राहत राशि या कर्जमुक्ति का प्रमाणपत्र नहीं भेजा, तो राज्यव्यापी किसान असंतोष महायुति के लिए आगामी विधानसभा चुनावों में बेहद महंगा साबित हो सकता है।

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