किसानों के लिए खुशखबरी, महाराष्ट्र लैंड रेवेन्यू कोड में बदलाव, जमीन विवाद सुलझाना हुआ आसान

Revenue Department GR: महाराष्ट्र में जमीन और घरों के शर्तभंग मामलों को अब जिलाधिकारी नियमित कर सकेंगे। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जारी किया नया शासनादेश। किसानों को मिलेगी बड़ी राहत।
Good News for Farmers: Changes to the Maharashtra Land Revenue Code Make Resolving Land Disputes Easier
चंद्रशेखर बावनकुले (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Published on
Updated on

Land Revenue Code Amendment: मुंबई, ग्रामीण क्षेत्रों में घरों एवं खेती की जमीनों के लिए लगी शर्तों के उलंघन के मामलों में अब लोगों को मंत्रालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए कहा कि अब घरों और खेती संबधी जमीनों के शर्तभंग मामलों को रेगुलर करने का अधिकार डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को दे दिया गया है। इसके पहले यह अधिकार राजस्व मंत्री के पास था। इस बारे में गजट जारी कर दिया गया है।

किसानों को मिलेगी राहत

इस फैसले से राज्य के किसानों समेत आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अक्सर, शर्तों के उल्लंघन के मामलों में राजस्व मंत्रालय से संपर्क करना पड़ता था। इसमें समय और व्यय दोनों होता था। आम लोगों को हो रही इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर, रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने शर्तों के उल्लंघन के दस लाख तक के जुर्माने वाले मामले डिस्ट्रिक्ट कलेक्टरों को और बीस लाख तक के जुर्माने वाले मामले डिविजनल कमिश्नरों को सौंप दिए हैं।

जारी किए गए गजट में कहा गया है कि इन अधिकारियों के दायरे से बाहर के मामलों पर फैसला मिनिस्टर लेवल पर लिया जाएगा। राज्य भर में शर्तभंग के मामलों की संख्या बढ़ने के कारण उनके कानूनी निपटारे के लिए लॉ एंड जस्टिस डिपार्टमेंट के निर्देश पर विधानसभा के पिछले सेशन में महाराष्ट्र लैंड रेवेन्यू कोड में बदलाव किए गए थे। उसके बाद शुक्रवार को गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया। जिन नागरिकों के लेन-देन टेक्निकल दिक्कतों की वजह से अटके हुए थे, उन्हें अब राहत मिलेगी। यह फैसला लेने से पहले जनता की भी राय जानी गई। इसका मकसद यह पक्का करना है कि नागरिकों को छोटी-छोटी बातों के लिए मिनिस्ट्री आने की ज़रूरत महसूस न हो।

लोगों को मिलेगी राहत - राजस्व मंत्री

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि नए जीआर से काफी राहत मिलेगी। अभी तक, सरकार द्वारा पज़ेशन या लीज़ पर दी गई ज़मीनों के मामले में शर्तभंग को रेगुलराइज़ करने का कोई साफ़ कानूनी नियम नहीं था। यह काम सिर्फ़ सरकारी सर्कुलर के आधार पर होता था। लेकिन, इस प्रोसेस का कोई कानूनी आधार न होने की वजह से कई मामले कोर्ट में चले जाते थे या पेंडिंग रह जाते थे। यह कमी अब दूर हो गई है।

Navbharat Live
navbharatlive.com