Bombay High Court Justice Gautam Patel: केंद्र सरकार और मुंबई पुलिस ने पूर्व न्यायाधीश गौतम पटेल को 2024 के दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार फैसले को लेकर जान से मारने की कथित धमकियों की जांच से जुड़ी अपनी रिपोर्ट बृहस्पतिवार को मुंबई उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की और अदालत ने इन्हें गोपनीय रखने का आदेश दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की खंडपीठ ने कहा कि जांच के विवरण को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।
अदालत ने कहा कि हम सभी ने देखा कि 26 नवंबर 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान क्या हुआ था। पूरी घटना का प्रसारण टेलीविजन पर किया गया था जिससे जांच और अन्य कार्रवाई में बाधा आई थी।
मुंबई पुलिस आयुक्त द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार को मिली धमकियों के संबंध में यहां 2 गैर-संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए हैं। महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि जांच जारी है और अगली सुनवाई की तारीख पर अदालत में एक और वस्तुस्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। विदेश मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार को लंदन में प्रदान की गई।
न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार के सदस्यों को पिछले 10 महीनों से धमकी भरे पत्र मिल रहे हैं। पत्र के साथ एक डिजिटल स्टोरेज उपकरण भी भेजा गया था जिसे लंदन पुलिस को सौंप दिया गया है। धमकी भरे पत्र भेजने वालों ने मांग की है कि पूर्व न्यायाधीश यूट्यूब पर एक वीडियो जारी कर दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार फैसले पर मांफी मांगें और कहें कि उन्होंने यह फैसला 'दबाव और मजबूरी' में सुनाया था।
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न्यायमूर्ति पटेल की पत्नी को भी इसी तरह की धमकियां मिली थीं। 3 अधिवक्ता संघों ने पिछले महीने इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका दायर किये जाने के बाद पुलिस ने पिछले महीने हाई कोर्ट को सूचित किया कि मुंबई शहर में न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार को पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई है।