नासिक कुंभ मेले की तैयारियों पर संकट: MIDC ने STP के लिए जमीन देने से किया मना, हाईकोर्ट समिति को सौंपा ज्ञापन

Nashik Kumbh Mela: नासिक के औद्योगिक क्षेत्र में एसटीपी के लिए एमआईडीसी ने जमीन देने से इनकार कर दिया है। जनहित याचिकाकर्ता ने कुंभ मेले की तैयारियों पर संकट जताते हुए ज्ञापन सौंपा है।
MIDC has refused to provide land for an STP project in Nashik. A petition has been submitted to the High Court committee raising environmental concerns over Kumbh Mela.
(प्रतीकात्मक इमेज- (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nashik Kumbh Mela MIDC Refusal: अंबड-सातपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और सीवेज पंपिंग स्टेशन के लिए एमआयडीसी द्वारा भूखंड उपलब्ध कराने से मना करने के बाद सिंहस्थ कुंभ मेले की पर्यावरणीय तैयारियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जनहित याचिकाकर्ता राजेश पंडित ने इस मामले में गंभीर अनियमितता का आरोप लगाते हुए विभागीय आयुक्त और उच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति के अध्यक्ष प्रवीण गेडाम को ज्ञापन सौंपा है।

अंबड और सातपुर औद्योगिक क्षेत्र के दूषित जल के उपचार के लिए एसटीपी प्रकल्प का प्रस्ताव था। एमआयडीसी द्वारा दो भूखंड देने की संभावना के आधार पर नाशिक महानगरपालिका ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण को मंजूरी के लिए भेजी थी। इसकी जानकारी मुंबई उच्च न्यायालय में शपथपत्र के माध्यम से भी दी गई थी। 8 अप्रैल के अपने पत्र में एमआयडीसी ने स्पष्ट कर दिया कि भूखंड देना संभव नहीं है। इसके बाद 25 जून को एमपीसीबी की बैठक में भी एमआयडीसी ने आधिकारिक रूप से इसी बात को दोहराया।

नंदिनी नदी पर घाटों के निर्माण कार्य को रोक

महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडळ राजेश पंडित ने अपने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से तीन महत्वपूर्ण मांगे की है- एमआयडीसी की भूमिका और न्यायालय के समक्ष हुई भ्रामक प्रस्तुति की जानकारी तुरंत मुंबई उच्च न्यायालय को दी जाए। जब तक एसटीपी प्रकल्प शुरू नहीं हो जाता, तब तक नंदिनी नदी पर घाटों का निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोका जाए। उनका तर्क है कि दूषित पानी में श्रद्धालुओं का स्नान स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।

इस पूरे मामले में गलत जानकारी देने वाली एजेंसियों के विरुद्ध सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। राजेश पंडित का कहना है कि यदि औद्योगिक क्षेत्र का दूषित पानी बिना उपचार के नदियों में बहाया गया, तो कुंभ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ेगा, ज्ञापन के साथ एमआयडीसी का 8 अप्रैल का पत्र और एमपीसीबी बैठक का कार्यवृत्त भी सबूत के तौर पर संलग्न किया गया है।

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