सफाई कर्मचारियों की सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
मुंबई

स्टेशन तो ले लिया,कर्मचारी कहां जाएं? इन स्टेशनों के 375 सफाईकर्मी हुए बेरोजगार! सीएम और रेलमंत्री से गुहार

Navi Mumbai Station Transfer: CIDCO से मध्य रेलवे को स्टेशनों के हस्तांतरण के बाद सफाई कर्मचारियों पर बेरोजगारी का संकट मंडरा रहा है। इस मामले में CM और रेल मंत्री से गुहार लगाने का निर्णय लिया है।

सूर्यप्रकाश मिश्र, गोरक्ष पोफली

375 Sanitation Workers Job Crisis: नवी मुंबई के रेलवे स्टेशनों पर वर्षों से सफाई का जिम्मा संभाल रहे सफाईकर्मियों पर बेरोजगारी की तलवार लटक गई है। इस मामले में बेलापुर की विधायक मंदा म्हात्रे ने इन कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लेने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री और रेल मंत्री से चर्चा करने की बात कही है।

क्या है पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि नवी मुंबई के 14 रेलवे स्टेशनों को पिछले माह से सिडको से मध्य रेलवे के पास स्थान्तरित कर दिया गया था। इन स्टेशनों की सफ़ाई के लिए तैनात 375 सफाई कर्मचारियों के सामने अपनी नौकरी जाने का खतरा पैदा हो गया।

मंदा म्हात्रे ने उठाया मुद्दा

इसी मुद्दे को लेकर अब 375 सफाई कर्मचारियों के पुनर्नियोजन का मामला उठाया गया है। मंदा म्हात्रे ने कहा कि इन कर्मचारियों ने लंबे समय तक नवी मुंबई के रेलवे स्टेशनों की स्वच्छता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ऐसे में उनके रोजगार का सवाल मानवीय और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। म्हात्रे ने कहा कि वह इस विषय को मुख्यमंत्री और केंद्रीय रेल मंत्री के समक्ष रखेंगी तथा कर्मचारियों को दोबारा काम पर लेने के लिए आवश्यक स्तर पर चर्चा करेंगी।

मध्य रेलवे के पास स्टेशन

नवी मुंबई के वाशी, सानपाड़ा, नेरुल, सीवुड्स, बेलापुर, ऐरोली, घनसोली, कोपरखैरने, खारघर सहित 14 स्टेशनों की व्यवस्था अब 14 अगस्त से मध्य रेलवे ने संभाला है।

अब नजर इस बात पर है कि सरकार और रेलवे इन कर्मचारियों के रोजगार को लेकर क्या निर्णय लेते हैं।

कर्मचारियों की चिंता और जीवन यापन का संकट

अचानक आए इस संकट के कारण इन 375 सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। वर्षों से निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर नई नौकरी पाना उनके लिए नामुमकिन सा है।

घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों का इलाज जैसी बुनियादी ज़रूरतें अब इसी आय पर टिकी हैं। सिडको से मध्य रेलवे में हुए इस प्रशासनिक बदलाव के बीच अपनी नौकरी अचानक छिन जाने की आशंका से सभी कर्मचारी गहरे मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।

प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदना का संदेश

ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि कोई भी प्रशासनिक या नीतिगत हस्तांतरण केवल कागजी प्रक्रियाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के मानवीय पक्ष का भी विशेष ध्यान रखा जाए।

सिडको, मध्य रेलवे और राज्य सरकार को आपस में बेहतर समन्वय बनाकर इन अनुभवी सफाईकर्मियों के पुनर्नियोजन के लिए ठोस और स्थायी रास्ता निकालना चाहिए, ताकि विकास और व्यवस्था परिवर्तन की इस दौड़ में समाज के इस अंतिम पायदान के मेहनती वर्ग का रोजगार और स्वाभिमान सुरक्षित रह सके।

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