

Sambhajinagar Property Resurvey Project 40 Crore Tender: छत्रपति संभाजीनगर शहर की मालमत्ताओं के पुनर्सर्वेक्षण और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए महानगरपालिका को दूसरी बार आमंत्रित की गई निविदा में तीन एजेंसियों का प्रतिसाद मिला है। ऑर्नेट, पोर और स्थापत्य ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए अपनी निविदाएं प्रस्तुत की हैं।
तीनों एजेंसियों की तकनीकी निविदाएं खोल दी गई हैं और अब उनके दस्तावेजों तथा निर्धारित तकनीकी मानकों की जांच की जा रही है। तकनीकी जांच में पात्र ठहरने वाली एजेंसियों की ही वित्तीय निविदाएं खोली जाएंगी। लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत वाले इस व्यापक सर्वेक्षण से शहर की मालमत्ता कर व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।
महानगरपालिका ने शहर की सभी मालमत्ताओं का वास्तविक स्वरूप, उपयोग, क्षेत्रफल और करयोग्य मूल्य निर्धारित करने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए 2 सितंबर को निविदा जारी की गई थी। पहली निविदा प्रक्रिया में अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिलने के कारण महानगरपालिका को दोबारा निविदा आमंत्रित करनी पड़ी। दूसरी बार तीन एजेंसियों ने भाग लिया है। इससे अब प्रक्रिया आगे बढ़ने का मार्ग खुल गया है।
तकनीकी निविदाओं में संबंधित एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत अनुभव, आवश्यक दस्तावेज, कार्यक्षमता और निविदा की शर्तों के अनुरूप पात्रता की जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया में पात्र पाए जाने वाले आवेदकों की वित्तीय निविदाएं खोली जाएंगी। इसके बाद परियोजना के लिए एजेंसी के चयन की अगली प्रक्रिया पूरी होगी।
इस परियोजना का दायरा केवल मालमत्ता कर के पुनर्निर्धारण तक सीमित नहीं है। महानगरपालिका सीमा में आने वाली सभी मालमत्ताओं का विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा। प्रत्येक मालमत्ता की जानकारी एकत्र कर उसका मूल्यांकन किया जाएगा। कर योग्य मूल्य निर्धारित करने के साथ पूंजीगत मूल्य पद्धति के आधार पर भी आवश्यक जानकारी तैयार की जाएगी।
महानगरपालिका की स्वामित्व वाली मालमत्ताओं, बाजार क्षेत्रों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और व्यावसायिक स्थापनाओं का भी सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही इन मालमत्ताओं के प्रबंधन, मूल्यांकन और अभिलेखों के संगणकीकरण की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे महानगरपालिका के पास शहर की मालमत्ताओं का अधिक व्यवस्थित और अद्यतन विवरण उपलब्ध हो सकेगा।
परियोजना में जलापूर्ति व्यवस्था को भी शामिल किया गया है। शहर में मौजूद पानी के सभी कनेक्शनों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके तहत उपभोक्ता, कनेक्शन और मीटर से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। मीटर के विवरण की जांच के साथ पानी शुल्क निर्धारण, बिल तैयार करने और वसूली की प्रक्रिया के संगणकीकरण के लिए आवश्यक प्रणाली विकसित की जाएगी।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद जलापूर्ति से संबंधित जानकारी को एकीकृत करने में सहायता मिलेगी। साथ ही पानी कनेक्शनों और उपभोक्ताओं के उपलब्ध अभिलेखों का प्रत्यक्ष स्थिति से मिलान किया जा सकेगा।
निविदा में अग्नि सुरक्षा तथा निर्धारित नियमों के अनुपालन से संबंधित सर्वेक्षण भी शामिल किया गया है। बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जानकारी एकत्र करने के साथ उनकी आवश्यक जांच की जाएगी। छत्रपति संभाजीनगर मनपा के स्वामित्व वाली संपत्तियों का भी विस्तृत अभिलेखीकरण किया जाएगा।
इससे अलग-अलग विभागों में बिखरी मालमत्ता संबंधी जानकारी को एकत्रित कर एक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करने का उद्देश्य है। सर्वेक्षण के दौरान उपलब्ध जानकारी का कम्प्यूटरीकृत भी किया जाएगा।
चयनित निजी एजेंसी को पूरे सर्वेक्षण और संबंधित कार्यों को 18 महीने में पूरा करना होगा। इसके बाद भी एजेंसी की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी। निविदा की शर्तों के अनुसार उसे अगले पांच वर्षों तक मालमत्ताओं से संबंधित निर्धारित जिम्मेदारियां निभानी होंगी। इस अवधि में तैयार की गई व्यवस्था और अभिलेखों से जुड़े कार्यों में आवश्यक सहयोग देना होगा।
शहर की सभी मालमत्ताओं के पुनर्सर्वेक्षण, पुनर्मूल्यांकन, जल कनेक्शन सर्वेक्षण, संगणकीकरण और अन्य संबंधित कार्यों पर लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना के लिए महानगरपालिका को जिला योजना समिति से भी कुछ निधि मिलने की उम्मीद है।
छत्रपति संभाजीनगर शहर की सभी मालमत्ताओं का व्यापक सर्वेक्षण कराने का निर्णय जुलाई में हुई महानगरपालिका की सामान्य सभा में लिया गया था। सभा के निर्णय के अनुसार निजी एजेंसी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन का कहना है कि राज्य की कुछ महानगरपालिकाओं में इस प्रकार की व्यवस्था लागू किए जाने के बाद मालमत्ता कर से प्राप्त राजस्व में वृद्धि हुई है। अब छत्रपति संभाजीनगर में भी इसी दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
तकनीकी जांच के परिणाम के बाद यह स्पष्ट होगा कि तीनों में से कितनी एजेंसियां निर्धारित मानकों पर खरी उतरती हैं। इसके बाद पात्र एजेंसियों की वित्तीय निविदाएं खोली जाएंगी और परियोजना के लिए अंतिम चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।