Mumbai BEST Bus Strike Police Action MESMA: मुंबईकरों की दूसरी लाइफलाइन कही जाने वाली बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं यातायात (BEST) की बस सेवा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण पूरी तरह चरमरा गई है। शुक्रवार (19 जून 2026) से शुरू हुए इस अचानक चक्काजाम से आर्थिक राजधानी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है, जिससे रोजाना सफर करने वाले 23 से 25 लाख यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, आंदोलन के हिंसक मोड़ लेने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने के बाद मुंबई पुलिस और प्रशासन ने हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाने की तैयारी पूरी कर ली है।
प्रशासन ने इस बेस्ट बस हड़ताल को 'महाराष्ट्र अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम' (MESMA) के तहत पहले ही अवैध घोषित कर दिया था, जिसके बाद अब प्रदर्शनकारियों (खासकर बसों पर पथराव करने वाले कर्मचारियों) पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने की कार्रवाई शुरू की जा रही है।
बेस्ट प्रशासन के अनुसार, शहर भर के 27 डिपो से शुक्रवार सुबह भारी सुरक्षा के बीच महज 38 बसें सड़कों पर उतारी गई थीं। लेकिन विभिन्न डिपो के बाहर जमा आंदोलनकारी कर्मचारियों ने न केवल इन बसों को रोकने का प्रयास किया, बल्कि कुछ इलाकों में बसों पर पथराव भी किया। इस पथराव के कारण खिड़कियों के कांच टूट गए, जिससे सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 6 बसों को तुरंत वापस डिपो भेजना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि 2,766 बसों के विशाल बेड़े में से पूरे दिन मुंबई की जनता के लिए केवल 32 बसें ही संचालित की जा सकीं।
बसों पर हुए हमलों और डिपो के कामकाज में बाधा डालने की घटनाओं को मुंबई पुलिस ने बेहद गंभीरता से लिया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जिन कर्मचारियों या प्रदर्शनकारियों ने बसों को रोकने की कोशिश की है या पथराव में शामिल रहे हैं, उनकी पहचान सीसीटीवी (CCTV) के जरिए की जा रही है। इन सभी के खिलाफ मेस्मा, 2023 के प्रावधानों और सरकारी काम में बाधा डालने की धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। पुलिस ने साफ किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने वाले कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह पूरा विवाद मुख्य रूप से बेस्ट के निजीकरण (वेट-लीज मॉडल) के विरोध और वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा है। वर्तमान में बेस्ट की 2,766 बसों में से केवल 249 बसें ही बेस्ट के खुद के स्वामित्व की हैं, जबकि बाकी निजी ठेकेदारों के जरिए संचालित हो रही हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं।
जब तक इन मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, यूनियनों ने काम बंद रखने का ऐलान किया है, जिसके चलते फिलहाल मुंबईकर ऑटो, टैक्सी, लोकल ट्रेन और मेट्रो के भरोसे सफर करने को मजबूर हैं।