

India On Middle East Tension: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपनी मांग दोहराई गई है। भारत की ओर से कहा गया है कि कमर्शियल समुद्री आवाजाही को 'भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बननी चाहिए'। भारत के जहाजों और नागरिकों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के टकराव की वजह से नुकसान उठाना पड़ा है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद में कहा कि नेविगेशन (समुद्री आवाजाही) के अधिकारों पर जबरदस्ती, धमकियों, गैर-कानूनी प्रतिबंधों या मनमाने दखल का असर नहीं पड़ना चाहिए।
पी. हरीश ने कहा कि भारत एक प्रमुख समुद्री देश है और हम एक ऐसे समुद्री क्षेत्र का पुरजोर समर्थन करते हैं जो आजाद, खुला, सुरक्षित और नियमों पर आधारित हो। हरीश ने बहरीन की ओर से बुलाई गई परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में बात की। यह बैठक 'आरिया-फॉर्मूला' के तहत समुद्री सुरक्षा माहौल पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी। इसका नाम वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो आरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1992 में इस संस्था की अध्यक्षता करते हुए ऐसी बैठकों की शुरुआत की थी।
स्ट्रीट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से भारत को आर्थिक नुकसान भी हुआ है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई और वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम की कीमतों में भारी उछाल आया। हरीश ने कहा कि खाड़ी और पश्चिम एशिया में आई रुकावटों का ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मामले में दुनिया भर के क्षेत्रों पर असर पड़ता है। उन्होंने उन घटनाओं या हमलों में शामिल पक्षों का नाम नहीं लिया, जिनमें ईरान और अमेरिका के साथ-साथ अन्य खाड़ी देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए टकराव के दौरान भारत को भी नुकसान उठाना पड़ा।
भारत ने अपने नाविकों की मौत को लेकर ईरान और अमेरिका के सामने विरोध दर्ज कराया है, और तेहरान के सामने भारतीय-पंजीकृत जहाज पर हुए हमले का भी विरोध किया है। अप्रैल में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गनबोट्स ने भारतीय झंडे वाले दो टैंकरों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। जुलाई में संयुक्त अरब अमीरात में पंजीकृत दो जहाजों पर ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया था। भारत ने नई दिल्ली में ईरानी राजनयिकों के सामने इन दोनों घटनाओं का विरोध किया।