शिवसेना (UBT) गुट के प्रवक्ता आनंद दुबे  सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

क्या उद्धव ठाकरे ने आनंद दुबे को पार्टी से निकाला? शिवसेना UBT प्रवक्ता ने वीडियो जारी कर बताया सच

Anand Dubey Video Message Clarification: आनंद दुबे को पार्टी से निष्कासित करे का कथित पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। दुबे ने वीडियो जारी कर इसे झूठा बताया।

वेदांत जोशी

Anand Dubey Shiv Sena UBT Expulsion Fake Letter Viral: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के प्रवक्ता आनंद दुबे की पार्टी से निष्कासन की खबर मंगलवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। हकालपट्टी का दावा करने वाला एक कथित पत्र भी सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। हालांकि, आनंद दुबे ने खुद वीडियो संदेश जारी कर इस खबर का खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें पार्टी से नहीं निकाला गया है।

कथित पत्र को लेकर शुरू हुई चर्चा

सोशल मीडिया पर वायरल पत्र में आनंद दुबे के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाए जाने का दावा किया गया था। पत्र सामने आने के बाद ठाकरे गुट के राजनीतिक हलकों में भी इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में केवल वायरल पत्र के आधार पर आनंद दुबे की निष्कासन को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

आनंद दुबे ने वीडियो जारी कर किया खंडन

वायरल खबर के बाद आनंद दुबे ने खुद सामने आकर वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने निष्कासन की खबर को झूठी और निराधार बताया। दुबे ने कहा कि वह अभी भी शिवसेना (UBT) में हैं और पार्टी का काम कर रहे हैं।

दुबे ने इस मामले में किसी व्यक्ति का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया। हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा को लेकर उपहासात्मक अंदाज में प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्हें पार्टी से निकाले जाने की खबर गलत है।

अभी तक हकालपट्टी की आधिकारिक पुष्टि नहीं

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आनंद दुबे की हकालपट्टी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। दूसरी ओर, दुबे ने स्वयं इस दावे को खारिज किया है। इसलिए फिलहाल इस पूरे मामले का आधार सोशल मीडिया पर वायरल हुआ कथित पत्र और उसके बाद आया दुबे का स्पष्टीकरण है।

ताजा रिपोर्टिंग में भी आनंद दुबे को शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता के रूप में ही संदर्भित किया गया है। ऐसे में उनके पार्टी से निकाले जाने या पार्टी छोड़ने को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना फिलहाल उचित नहीं होगा।

वायरल दावे के बजाय स्पष्टीकरण पर जोर

इस मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि निष्कासन का कथित पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लेकिन आनंद दुबे ने खुद इसकी पुष्टि नहीं की बल्कि इसका खंडन किया है। जब तक पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आती, वायरल पत्र में किए गए दावों को तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

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