ड्रॉप बॉक्स (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
गोंदिया

'ड्रॉप बॉक्स' से पता लगाएंगे छात्रों की कमी, मिशन जीरो ड्रॉप बॉक्स को लेकर गोंदिया में समितियां गठित

Gondia News: पहली कक्षा के बच्चों को दूसरे वर्ष में उपस्थित होना चाहिए। लेकिन पहली कक्षा में नामांकित बच्चे दूसरे वर्ष में उपस्थित नहीं होते हैं। अब इन ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान की जाएगी।

प्रिया जैस

Gondia News: पहली कक्षा के बच्चों को दूसरे वर्ष में उपस्थित होना चाहिए। लेकिन पहली कक्षा में नामांकित बच्चे दूसरे वर्ष में उपस्थित नहीं होते हैं, उन्हें ड्रॉपआउट बच्चे कहा जाता है। ऐसे बच्चों को ड्रॉप बॉक्स कहा जाता है। उस ड्रॉप बॉक्स को समाप्त करने के लिए मिशन जीरो ड्रॉप बॉक्स नाम दिया गया है। पिछले शैक्षणिक वर्ष में शामिल बच्चों को स्कूल की अगली कक्षा में होना चाहिए था। लेकिन, 12,321 छात्र कम हैं।

विभिन्न समितियों के माध्यम से उनके खोज अभियान को क्रियान्वित किया जा रहा है, और इसे मिशन ड्रॉप बॉक्स नाम दिया गया है। स्कूल न जाने वाले बच्चों की सांख्यिकीय जानकारी, उपाय, केस स्टडी लिखने की योजना और विधि, बाल संरक्षण पंजीकरण लिंक और कार्य लिंक पर छात्रवार जानकारी निकालने के तरीके के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करके इस प्रणाली ने काम करना शुरू कर दिया है।

परिवारों का किया जाएगा सर्वेक्षण

प्रत्येक बच्चे को स्कूल की मुख्यधारा में लाने के लिए एक बाल संरक्षण आंदोलन का गठन किया गया है। बाल संरक्षण कार्यकर्ताओं के बीच आत्मीयता और सहानुभूति की आवश्यकता है। इस संबंध में, जिला शिक्षा विभाग, पश्चिम बंगाल ने एक विस्तृत योजना बनाई है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर समितियां और समन्वयक नियुक्त किए गए हैं। इस अभियान में ग्राम पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम के जन्म-मृत्यु दस्तावेजों के आधार पर परिवारों का सर्वेक्षण किया जाएगा।

अस्थायी रूप से विस्थापित परिवारों के बच्चों, अपनी मूल बस्ती से दूसरी बस्ती में स्थानांतरित हुए बच्चों और दूसरी बस्ती से स्कूल बस्ती में स्थानांतरित हुए बच्चों की जानकारी एकत्र की जाएगी। जिला परिषद के शिक्षा विभाग ने संबंधितों को निर्देश दिए गए हैं कि ग्राम स्तरीय समिति घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करे कि गांव का प्रत्येक बच्चा शिक्षा की धारा में नामांकित हो। इसके तहत स्कूल न जाने वाले छात्रों का पता लगाना और स्कूल छोड़ने की दर को शून्य तक लाना है।

अभिभावक की अनदेखी से छात्रों की कमी

अभिभावक के पलायन के कारण बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। जीविकोपार्जन के लिए एक गांव से दूसरे गांव जाने वाले माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। अगर भेजते भी हैं, तो वे हमेशा स्कूल नहीं जाते। एक गांव से दूसरे गांव जाने के बाद, वे अपने बच्चों को वहां के स्कूल में नहीं भेजते। शिक्षा विभाग भी इस पर ध्यान नहीं देता। इसीलिए बच्चे ड्रॉप बॉक्स में मिलते हैं।

भूकंप के झटकों से कांपा लेह, सुबह 6 बजे 5.5 तीव्रता के लगे झटके, घरों से बाहर भागे लोग

आज की ताजा खबर 13 अगस्त LIVE: संसद का मानसून सत्र आज होगा खत्म, छात्र आंदोलन पर हो सकती है चर्चा

जरा याद करो कुर्बानी: अंग्रेजों के सामने नहीं झुके हिलसा के 11 वीर, तिरंगे के लिए सीने पर खाई थीं गोलियां

आज की ताजा खबर 12 अगस्त LIVE: एक क्लिक में पढ़ें दिनभर की सारी बड़ी खबरें

पूरा सत्र बीत गया, देश का पैसा बर्बाद हुआ, FCRA बिल को JPC के पास भेजने पर भड़का विपक्ष