Gadchiroli Elephant Monitoring Devendra Fadnavis: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर गड़चिरोली जिले में वन्यजीव प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न पहलें शुरू की गई हैं। इसी क्रम में जिले में हाथियों की गतिविधियों की वैज्ञानिक निगरानी तथा उनके आवागमन संबंधी सटीक जानकारी एकत्रित करने के लिए एक विशेष अभियान को गति दी गई है।
इस उद्देश्य से महाराष्ट्र वन विभाग ने 'फार्मर्स फॉर फॉरेस्ट्स' संस्था को गड़चिरोली जिले में हाथियों की गतिविधियों के अध्ययन और संबंधित कार्यों के लिए एक वर्ष की अनुमति प्रदान की है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) तथा मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, महाराष्ट्र राज्य द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह संस्था वन विभाग के समन्वय से हाथियों की गतिविधियों का दस्तावेजीकरण, भ्रमण मार्गों का विश्लेषण
तथा क्षेत्रीय जानकारी संकलन का कार्य करेगी। हाथियों के झुंडों की नियमित निगरानी कर संबंधित जानकारी वन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। इस परियोजना के तहत विदर्भ क्षेत्र के हाथियों की एक स्वतंत्र पहचान पंजी (आईडी रजिस्टर) तैयार की जाएगी, जिसमें हाथियों के छायाचित्र, झुंडों की संरचना, आयु एवं लिंग वर्गीकरण तथा उनके व्यवहार संबंधी विवरण शामिल होंगे। इससे हाथियों की गतिविधियों का अधिक सटीक अध्ययन संभव हो सकेगा।
जीआईएस तकनीक की सहायता से हाथियों के भ्रमण मार्गों के मानचित्र तैयार किए जाएंगे। साथ ही उनके विश्राम स्थलों, सड़क पार करने वाले क्षेत्रों और संभावित मानव-हाथी संघर्ष वाले स्थानों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त गांववार घटनाओं का रिकॉर्ड तैयार कर हाथियों की गतिविधियों का विश्लेषण किया
जाएगा। स्थानीय नागरिकों को हाथियों की गतिविधियों की समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए जनजागरूकता कार्यक्रम, ग्राम स्तरीय बैठकें और सूचना प्रसार अभियान चलाए जाएंगे। स्कूलों के लिए जानकारीपरक सामग्री तैयार की जाएगी तथा वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदाय के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
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परियोजना के अंतर्गत त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट, तकनीकी दस्तावेज, मानचित्र और क्षेत्रीय अध्ययन रिपोर्ट वन विभाग को प्रस्तुत की जाएंगी। इनके आधार पर भविष्य की योजना और वन्यजीव प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
गड़चिरोली जिले में बढ़ती हाथियों की आवाजाही की पृष्ठभूमि में शुरू किया गया यह अभियान वन विभाग को हाथियों की गतिविधियों संबंधी सटीक और अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगा। वन्यजीव प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।