

18th BRICS Summit in Delhi: देश की राजधानी दिल्ली दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन के लिए पूरी तरह से सजकर तैयार है। 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम को लेकर दिल्ली को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रखा गया है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए हुए दिल्ली में दो दिनों की सार्वजनिक छुट्टी घोषित कर दी गई है।
2021 के बाद भारत पहली बार इस समिट की मेजबानी करने जा रहा है। कोविड के कारण 2021 में भारत ने इस सम्मेलन को वर्चुअली होस्ट किया था। इस आयोजन में किस-किस देशों के सर्वोच्च नेता शामिल होंगे और भारत की लिहाज से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कितना खास है? आइए सबकुछ विस्तार से जानते हैं।
नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन में 11 सदस्य देशों और सहयोगी/ आमंत्रित देशों के टॉप लीडर भाग लेने जा रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिट को होस्ट करेंगे। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्त्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी, इथोपियो के प्रधानमंत्री अबिय अहमद, इंडोनिशया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कीयान और संयुक्त अरब अमीरात से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद अल नाहयान के शामिल होने की जानकारी है।
आपको बताते चले के 11 सदस्य देश इस ऐतिहासिक सम्मेलन का हिस्सा हैं। इसके अलावा कई अन्य मेहमान देशों के प्रतिनिधियों, सीनियर ऑफिसर्स और अंतरराष्ट्रीय संगठनों (जैसे- वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेश के महानिदेशक के प्रमुख भी शामिल हो रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों, वैश्विक तनाव, युद्धों में महाशक्तियों की सीधी संलिप्तता और सदस्य देशों की भौगोलिक दूरियों जैसे कारणों से 12-13 सितंबर को भारत की अध्यक्षता में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के नतीजों को लेकर विश्लेषक भले ही बहुत उत्साहित न हों, लेकिन कूटनीति में कई बार 'ऑप्टिक्स' वास्तविक फैसलों से भी अधिक महत्वपूर्ण साबित होता है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक साथ देखना अपने आप में दुनिया के लिए एक बड़ा संदेश है।
11 पूर्णकालिक और 10 सहयोगी सदस्य देशों वाला ब्रिक्स वैश्विक आबादी के आधे हिस्से और वैश्विक नॉमिनल जीडीपी के 28 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें भारत, चीन, रूस और ब्राजील इसके मुख्य स्तंभ हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग लगभग 400 उद्योगपतियों और आर्थिक-वाणिज्यिक दिग्गजों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं, जो 2014 की गांधीनगर और 2019 की महाबलीपुरम यात्रा के बाद उनकी पहली नई दिल्ली यात्रा होगी।
इस माहौल में दोनों देशों के लिए द्विपक्षीय कूटनीति को नया मोड़ देना आवश्यक है, जहां भारत रूस से अत्याधुनिक हथियार और चीन से रेयर-अर्थ की बिना किसी रूकावट सप्लाई का भरोसा चाहता है, वहीं ब्राजील और रूस डॉलर के विकल्प के रूप में नई ब्रिक्स करेंसी का मुद्दा एक बार फिर इस मंच पर उठा सकते हैं।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और तेल की अस्थिर कीमतों के बीच, ब्रिक्स के नए सदस्य देश (जो कच्चे तेल और खनिजों के बड़े उत्पादक हैं) भारत की ऊर्जा और खनिज आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार साबित होंगे। भारत इस मंच का उपयोग ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत और विविधतापूर्ण बनाने के लिए कर रहा है, जिससे भारतीय MSMEs को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
इसके साथ ही भारत खुद को 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) के एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित कर रहा है। इस शिखर सम्मेलन के जरिए भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को मजबूती से उठा रहा है