Gadchiroli Drought: जून से सितंबर तक के 4 माह को मानसूनी बारिश के माह माने जाते है। इन 4 माह की बारिश दर्ज की जाती है। अब जिले में बारिश ने विराम ले लिया है। इस वर्ष भामरागड़ को छोड़कर जिले की किसी भी तहसील में बारिश ने औसत का 100 प्रतिशत आंकड़ा नहीं छुआ। पिछले वर्ष इन चार महीनों में औसत की तुलना में 117.5 प्रतिशत बारिश हुई थी, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा घटकर केवल 84.3 प्रतिशत रह गया है।
कम बारिश के कारण आगामी मानसून तक पानी का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की आवश्यकता जताई जा रही है। इस वर्ष जिले में सबसे कम बारिश चामोर्शी तहसील में दर्ज की गई, जहां औसत की तुलना में केवल 52.6 प्रतिशत बारिश हुई। इसके बाद गडचिरोली तहसील में 62.6 प्रतिशत और मुलचेरा में 64.5 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। इस तरह इन तीनों तहसीलों में बारिश 75 प्रतिशत से भी कम रही है।
गड़चिरोली जिले की अन्य तहसीलों में भी बारिश औसत से कम रही। धानोरा में औसत की 76.9 प्रतिशत, देसाईगंज में 93.3 प्रतिशत, आरमोरी में 81.5 प्रतिशत, कुरखेड़ा में 85.1 प्रतिशत, कोरची में 83.5 प्रतिशत, अहेरी में 88.7 प्रतिशत, सिरोंचा में 96.6 प्रतिशत तथा एटापल्ली में 76.9 प्रतिशत बारिश हुई। वहीं, भामरागढ़ तहसील में औसत से अधिक 102.9 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई।
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर हल्के धान की फसल पर पड़ने की आशंका है। फसल को जिस अवधि में बारिश की आवश्यकता थी, उस दौरान बारिश में देरी होने के कारण धान का उत्पादन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचने की संभावना है। प्रशासन की ओर से फिलहाल केवल गड़चिरोली और चामोर्शी तहसीलों में सूखे जैसी स्थिति दर्शाई गई है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट के बाद सूखा प्रभावित अथवा सूखे जैसी स्थिति वाले तहसीलों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।