

Nashik Health System; Ambulance Issue: नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर तहसील के टाकेदेवगांव की बोड़ाची वाड़ी में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। नवजात बेटे की मौत के बाद वाहन और पैसे नहीं होने पर पिता ने कथित तौर पर बाइक से करीब 50 किमी का सफर तय कर शव गांव पहुंचाया।
नासिक, ब्यूरो. ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के सरकारी दावों के बीच त्र्यंबकेश्वर तहसील के टाकेदेवगांव स्थित बोड़ाची वाड़ी से सामने आया एक मामला व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां एक पिता को अपने मृत नवजात बेटे का शव हाथों में लेकर मोटरसाइकिल से करीब 50 किलोमीटर का सफर तय कर गांव लौटना पड़ा।
बोड़ाची वाड़ी निवासी मंगेश मेंगाल मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। गुरुवार शाम उनकी गर्भवती पत्नी संगीता को प्रसव पीड़ा के साथ सीने में दर्द हुआ। परिजन उन्हें पहले मोखाडा के नजदीकी अस्पताल ले गए। हालत गंभीर होने पर उन्हें नासिक जिला सरकारी अस्पताल रेफर किया गया।
शुक्रवार तड़के करीब 2 बजे संगीता ने बेटे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद यह खुशी मातम में बदल गई। सुबह करीब 11 बजे नवजात की मौत हो गई।
बच्चे की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद मंगेश ने घर लौटने के लिए अस्पताल कर्मियों से वाहन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई। उनका कहना था कि उनके पास निजी वाहन नहीं है और घर लौटने के लिए पर्याप्त पैसे भी नहीं हैं।
परिजनों का आरोप है कि उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई और संगीता को अस्पताल में भर्ती रखने की बात कही गई। इसके बाद मंगेश ने गांव में अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी।
कुछ समय बाद उनका भाई मोटरसाइकिल लेकर नासिक शहर पहुंचा। इसके बाद मंगेश अपने मृत नवजात बेटे का शव हाथों में लेकर भाई की मोटरसाइकिल पर सवार हुए और करीब 50 किलोमीटर दूर अपने गांव के लिए रवाना हुए।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तथा शव को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने जब निजी वाहन की सुविधा नहीं थी, तब उसे सरकारी स्तर पर किस तरह की सहायता मिली, यह सवाल अब उठ रहा है।
मामले में एंबुलेंस सेवा उपलब्ध न होने के आरोपों की वास्तविक स्थिति और अस्पताल प्रशासन की ओर से क्या व्यवस्था की गई थी, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। हालांकि, मृत नवजात को हाथों में लेकर बाइक से करीब 50 किलोमीटर का सफर करने की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों के सामने मानवीय संवेदनशीलता का गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।