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आरमोरी उपजिला अस्पताल में चार महिलाओं को सिजेरियन ऑपरेशन के लिए करीब 18 घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ी।
आवश्यक चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण शुक्रवार सुबह 10 बजे होने वाले ऑपरेशन समय पर नहीं हो सके।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजकुमार कोरोटी की पहल पर गड़चिरोली से डॉ. आत्राम और धानोरा से डॉ. दुधे को बुलाया गया।
Armori Sub District Hospital: गड़चिरोली जिले के आरमोरी के उपजिला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती चार गर्भवती महिलाओं को सिजेरियन ऑपरेशन के लिए करीब 18 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। आवश्यक डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण ऑपरेशन समय पर नहीं हो सके।
आखिरकार गड़चिरोली और धानोरा से डाक्टरों को बुलाया गया, जिसके बाद चारों महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी सफलतापूर्वक की गई। फिलहाल सभी माताएं और नवजात शिशु सुरक्षित हैं। जोगीसाखरा निवासी प्रियंका मडावी, विहीरगांव निवासी रामिका मडावी, कोकड़ी निवासी दीपाली वाटगुरे और आरमोरी निवासी प्रणाली कांबले समेत अन्य गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए आरमोरी के उपजिला अस्पताल में भर्ती हुई थीं।
शुक्रवार सुबह 10 बजे तक उनके सिजेरियन ऑपरेशन किए जाने की जानकारी दी गई थी। लेकिन आवश्यक चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण ऑपरेशन टलते रहे। इससे गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को कई घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ी। परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन की प्रतीक्षा कर रही महिलाओं को रात से ही बिना अन्न-जल के रहना पड़ा। इस मामले की जानकारी मरीजों के परिजन चेतन मडावी ने समाजसेवी दिलीप घोडाम को दी। सूचना मिलते ही घोडाम उपजिला अस्पताल पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली।
वहां मौजूद चिकित्सा अधिकारी डॉ. बन्सोड ने बताया कि, डाक्टर उपलब्ध नहीं हैं और उनके आने में देरी हो रही है। इस पर घोडाम ने सवाल उठाया कि, यदि आवश्यक डाक्टर उपलब्ध नहीं थे, तो गर्भवती महिलाओं को गड़चिरोली रेफर क्यों नहीं किया गया? इस पर डॉ. बन्सोड ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने की सलाह दी। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजकुमार कोरोटी उस समय अवकाश पर थे। इसके बावजूद दिलीप घोडाम ने उनसे फोन पर संपर्क कर पूरी स्थिति बताई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. कोरोटी ने तत्काल पहल की और गड़चिरोली से डॉ. आत्राम तथा धानोरा से डॉ. दुधे को आरमोरी बुलाया। आखिरकार शाम करीब 5 बजे चारों गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन ऑपरेशन सफलतापूर्वक हुए। समय पर हस्तक्षेप और लगातार प्रयासों के कारण ऑपरेशन हो सके, ऐसी भावना व्यक्त की है।
प्रसव जैसी संवेदनशील चिकित्सा सेवा के दौरान आवश्यक विशेषज्ञ डाक्टरों की उपलब्धता नहीं होना गंभीर मामला है। सुबह 10 बजे ऑपरेशन किए जाने की जानकारी देने के बावजूद डाक्टरों की व्यवस्था समय पर क्यों नहीं की गई? वैकल्पिक चिकित्सा अधिकारियों की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं थी? गर्भवती महिलाओं को करीब 18 घंटे तक इंतजार क्यों करना पड़ा?
ऐसे कई सवाल इस घटना के बाद उठ रहे हैं। इस मामले की जिला स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा आरमोरी उपजिला अस्पताल में 24 घंटे आवश्यक डाक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग दिलीप घोडाम, वृंदा मडावी और वेतन मडावी ने जिला शल्य चिकित्सक डॉ. रवि गावंडे से की है।