

Mumbai Metro Senior Citizens lift-distance-problem: मुंबई की एक्वा लाइन पर लिफ्ट और प्रवेशद्वार के बीच अधिक दूरी को लेकर यात्रियों की शिकायतें सामने आई हैं।
बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं का कहना है कि कई जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ता है। MMRCL के अनुसार प्रत्येक स्टेशन पर दिव्यांग व शारीरिक परेशानी वाले यात्रियों के लिए कम से कम दो लिफ्ट उपलब्ध हैं।
मुंबई की पहली भूमिगत मेट्रो मुंबई-3 यानी एक्वा लाइन आधुनिक सुविधाओं के साथ शुरू की गई है, लेकिन कुछ स्टेशनों पर लिफ्ट और प्रवेशद्वार की दूरी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं का कहना है कि लिफ्ट तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और कई जगह नीचे जाने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
यात्रियों के अनुसार, एसी और तेज सफर जैसी सुविधाओं के बावजूद स्टेशन के भीतर आवागमन की व्यवस्था अधिक सुविधाजनक होनी चाहिए। खासकर ऐसे यात्रियों के लिए जिन्हें सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में शारीरिक परेशानी होती है।
यात्रियों के मुताबिक शितलादेवी मेट्रो स्टेशन के ए-1 और बी-3 प्रवेशद्वार पर लिफ्ट उपलब्ध है। अंदर ऊपर जाने के लिए एस्केलेटर की सुविधा है, लेकिन नीचे जाने के लिए कई यात्रियों को सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है।
लिफ्ट का इस्तेमाल करने के लिए यात्रियों को सड़क पार कर करीब 120 से 190 मीटर तक पैदल चलना पड़ता है। यात्रियों का कहना है कि बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए इतनी दूरी तय करना मुश्किल हो सकता है।
यात्रियों का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारण एस्केलेटर भी कभी-कभी बंद रहते हैं। ऐसे में सीढ़ियों का विकल्प ही बचता है। एक यात्री अक्षय मिश्रा ने कहा कि लिफ्ट की सुविधा प्रवेशद्वार के अपेक्षाकृत नजदीक होनी चाहिए, ताकि बुजुर्ग यात्रियों को अनावश्यक दूरी तय न करनी पड़े।
एक अन्य यात्री सुषमा दुबे ने कहा कि गर्भवती महिलाओं के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल करना मुश्किल और असुविधाजनक है। लिफ्ट तक आसान पहुंच होने से यात्रियों को राहत मिल सकती है।
मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) के अनुसार, स्टेशनों की संरचना उपलब्ध जगह और यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। प्रत्येक स्टेशन पर शारीरिक परेशानी वाले यात्रियों के लिए कम से कम दो लिफ्ट उपलब्ध हैं। MMRCL ने यह भी कहा कि बुनियादी ढांचे में बदलाव की सीमाएं हैं, लेकिन तकनीकी रूप से संभव होने पर अतिरिक्त एस्केलेटर लगाने पर विचार किया जा सकता है।
एक्वा लाइन पर अगस्त में प्रतिदिन औसतन 1.88 लाख यात्रियों ने सफर किया। ऐसे में यात्रियों की सुविधा से जुड़े इन मुद्दों पर ध्यान दिए जाने की मांग बढ़ रही है।