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गड़चिरोली की एटापल्ली तहसील के सभी 177 गांवों में खरीफ फसलों की वास्तविक स्थिति का सर्वेक्षण कराने की मांग को लेकर पारंपरिक महाग्रामसभा ने रैली निकाली।
महाग्रामसभा ने निर्धारित मानदंडों के आधार पर तहसील को सूखाग्रस्त घोषित कर प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि फसल नुकसान का आकलन केवल सरकारी आंकड़ों से नहीं, बल्कि राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा खेतों में पहुंचकर किया जाना चाहिए।
Etapalli Drought Declaration Demand: खरीफ फसलों को हुए नुकसान से आर्थिक संकट का सामना कर रहे किसानों की समस्याओं को लेकर पारंपरिक महाग्रामसभा तहसील एटापल्ली की ओर से बुधवार को रैली निकालकर सरकार-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया।
इस दौरान तहसील के सभी 177 गांवों में फसलों की वास्तविक स्थिति का सर्वेक्षण कर तत्काल पंचनामा करने और निर्धारित मानदंडों के आधार पर एटापल्ली तहसील को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की गई। महाग्रामसभा की ओर से इस संबंध में मुख्यमंत्री एवं जिले के पालकमंत्री, उपपालकमंत्री के नाम उपविभागीय अधिकारी, एटापल्ली के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर प्रभावित किसानों को नियमानुसार आर्थिक सहायता देने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया है कि, एटापल्ली तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश परिवारों की आजीविका खेती पर निर्भर है। ऐसे में खरीफ सीजन में फसल उत्पादन घटने से किसानों की आर्थिक स्थिति के साथ ही उनके परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें भी प्रभावित होती हैं।
वर्ष 2026 के खरीफ सीजन में अनियमित बारिश, लंबे अंतराल और अन्य प्राकृतिक कारणों से फसलों की वृद्धि तथा संभावित उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है। किसानों ने बीज, खाद, खेतों की तैयारी और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च की है। इसके बावजूद अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने से उनके सामने कर्ज चुकाने और आगामी कृषि सीजन की तैयारी करने का संकट खड़ा हो सकता है।
महाग्रामसभा ने मांग की कि, फसल नुकसान का आकलन केवल कार्यालयीन आंकड़ों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर नहीं किया जाए, बल्कि संबंधित राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारी प्रत्यक्ष खेतों में पहुंचकर फसलों की स्थिति का निरीक्षण करें। बारिश के प्रभाव, उत्पादन में संभावित गिरावट और वास्तविक नुकसान को दर्ज करते हुए पारदर्शी तरीके से पंचनामा किया जाए।
तहसील के सभी 177 गांवों को सर्वेक्षण प्रक्रिया में शामिल करने पर जोर देते हुए महाग्रामसभा ने कहा कि, वास्तविक नुकसान का आकलन होने के बाद ही पात्र किसानों को शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता मिल सकेगी। इसके लिए राजस्व और कृषि विभाग को समन्वय से तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
किसानों की जायज मांगों के समर्थन में एकजुट होने का आह्वान करते हुए पारंपरिक महाग्रामसभा ने 'हक मांग रहे हैं, भीख नहीं!' का नारा दिया। महाग्रामसभा का कहना है कि, फसल नुकसान का पंचनामा, सूखाग्रस्त घोषित करने की प्रक्रिया और पात्र किसानों को आर्थिक सहायता देने का मुद्दा केवल किसी एक गांव का नहीं, बल्कि संपूर्ण तहसील की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा है।
अब महाग्रामसभा के ज्ञापन पर प्रशासन क्या कदम उठाता है, 177 गांवों में प्रत्यक्ष सर्वेक्षण कब शुरू होता है और प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने के संबंध में क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर किसानों की निगाहें टिकी हैं।