Dhule Raises Questions In Civic Body: घर-घर कचरा संकलन की निगरानी के लिए लगाए गए बारकोड ही अब सवालों के घेरे में आ गए हैं। महानगरपालिका की स्थायी समिति की बैठक में नगरसेवक बंटी मासुले ने आदर्शनगर क्षेत्र में घंटागाड़ी की कार्यप्रणाली का 10 दिन का वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत कर गंभीर सवाल उठाए।
आरोप है कि कर्मचारी घंटागाड़ी लेकर कचरा उठाने के बजाय दोपहिया वाहन से पहुंचता है, घर के बारकोड का स्कैन करता है और बिना कचरा लिए ही निकल जाता है। इसके बावजूद मनपा की व्यवस्था में कचरा संकलन पूर्ण होने की टिप्पणी दर्ज हो जाती है।
मामले से कचरा संकलन की निगरानी और ठेका व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े हुए। मंच पर सहायक आयुक्त हेमंत निकम, सभापति लताबाई सोनार, नगर सचिव मनोज वाघ उपस्थित थे। मासुले के अनुसार आदर्शनगर में करीब 200 से 250 घरों के बारकोड लगे हैं।
संबंधित कर्मचारी दोपहिया वाहन से पहुंचकर बारकोड स्कैन करता है। यदि कचरा उठाया ही नहीं गया तो केवल स्कैनिंग के आधार पर संबंधित घर का कचरा संकलित मानने की व्यवस्था पर उन्होंने धुले प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा। ठेकेदार की ओर से कचरा उठाने के बजाय स्कैनिंग पर जोर दिए जाने का आरोप भी बैठक में लगाया गया।
नगरसेवक आमिर पठान ने कहा कि नागरिकों से घरपट्टी के साथ 600 रुपए घंटागाड़ी कर लिया जा रहा है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में दो से तीन दिन तक कचरा उठाने के लिए घंटागाड़ी नहीं पहुंचती। नई 20 घंटागाड़ियों की उपलब्धता, पुरानी गाड़ियों की मरम्मत तथा ट्रैक्टर चालकों के चार महीने से प्रलंबित बिलों का मुद्दा भी उठाया गया।
स्थायी समिति में सार्वजनिक शौचालयों की सफाई व देखभाल का खर्च भी चर्चा में रहा। वर्तमान में 135 यूनिट पर 1.09 करोड़ रुपए वार्षिक खर्च हो रहा है। 26 नए यूनिट बढ़ने के बाद कुल 161 यूनिट के लिए यह खर्च 2.52 करोड़ रुपए प्रस्तावित है। यानी करीब 1.43 करोड़ रुपए की वृद्धि।
चर्चा के बाद मौजूदा ठेकेदार को बढ़े हुए काम के लिए तीन वर्ष तक अवधि बढ़ाने, आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराने और प्रत्येक प्रभाग के नगरसेवक से संतोषजनक कार्य प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही बिल भुगतान करने की शर्त पर जोर दिया गया। नगरसेविका वंदना भामरे ने शौचालयों की वास्तविक स्थिति और सफाई व्यवस्था पर प्रशासन को घेरा, जबकि नगरसेवक निलेश नेमाने ने भी व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।
बालापुर समेत कई क्षेत्रों में शौचालयों के टूटे दरवाजे, पानी की कमी और नियमित सफाई नहीं होने की शिकायतें सामने आईं। बैठक में 'माझी वसुंधरा' अभियान के तहत फूल-नारियल कचरे से अगरबत्ती व उपयोगी वस्तुएं बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।