Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply Scheme: छह से आठ दिन तक पानी का इंतजार करने वाले शहर में अब जलापूर्ति का चक्र धीरे-धीरे बदलने लगा है। नई जलापूर्ति योजना के तहत 18 जलकुंभों के कार्यान्वित होने और नई जल वाहिनियों से पानी पहुंचने के बाद शहर के कई इलाकों में तीन दिन के अंतराल पर, जबकि कुछ क्षेत्रों में चार दिन के अंतराल पर जलापूर्ति शुरू हो गई है।
नई व्यवस्था से केवल पानी की उपलब्धता ही नहीं बढ़ी है, बल्कि जल वाहिनियों में दबाव बढ़ने से अंतिम छोर के घरों तक पानी पहुंचाने में भी सुधार हुआ है।
अमृत-2 योजना के तहत 2,740 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के माध्यम से जीवीपीआर कंपनी द्वारा पूरी की जा रही है। जायकवाड़ी से दो पंपों के माध्यम से फिलहाल प्रतिदिन 100 एमएलडी पानी उठाया जा रहा है। नक्षत्रवाड़ी स्थित मुख्य जलाशय से अलग-अलग व्यास की नई जल वाहिनियों के माध्यम से शहर के विभिन्न जलकुंभों तक पानी पहुंचाया जा रहा है।
जुलाई से 1,500 मिमी व्यास की जलवाहिनी के माध्यम से सिडको एन-5, एन-7, हरसिद्धिमाता, मिसारवाड़ी, टीवी सेंटर-3 और हिमायतबाग के जलकुंभों को पानी मिलने लगा है। वहीं 2,000 मिमी व्यास की जलवाहिनी से म्हाडा कॉलोनी, हरिओमनगर, शिवाजी नगर, पुंडलिक नगर, पारिजात नगर और केटली गार्डन क्षेत्र की व्यवस्था मजबूत हुई है।
नक्षत्रवाड़ी और हिंदुस्तान आवास के लिए 1,100 मिमी तथा प्रतापनगर के लिए 1,400 मिमी व्यास की जलवाहिनी से पानी पहुंचाया जा रहा है। हर्सूल जेल और हर्सूल जल शोधन केंद्र के जलकुंभों को भी नई व्यवस्था से पानी मिलना शुरू हो गया है।इन जलकुंभों के सक्रिय होने से शहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी के वितरण का दबाव और मार्ग दोनों बदले हैं। इसका सीधा असर जलापूर्ति के अंतराल पर दिखाई देने लगा है।
नई योजना के तहत शहर में कुल 1,900 किमी लंबी जलवाहिनी का जाल बिछाया जाना है। इसमें लगभग 1,200 किमी का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही घर-घर नल कनेक्शन देने का काम भी जारी है। जीवीपीआर को 90 हजार नल कनेक्शन देने का लक्ष्य दिया गया है, जिसमें से करीब 45 हजार कनेक्शन अब तक पूरे किए जा चुके हैं। जहां नई जलवाहिनी का नेटवर्क अभी नहीं पहुंचा है, वहां महानगरपालिका के माध्यम से नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना है।
सातारा-देवलाई क्षेत्र में भी जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़े अधूरे हिस्सों को पूरा करने का काम जारी है। सुधाकर नगर, अमेरनगर, एजीपी पब्लिक स्कूल, हरिओमनगर और म्हाडा कॉलोनी के जलकुंभों से इस क्षेत्र में पानी पहुंचाने की तैयारी है। जलवाहिनी की आवश्यक जांच पूरी होने के बाद अक्टूबर से नवंबर के अंत तक सातारा-देवलाई क्षेत्र में नियमित जलापूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
नई योजना से फिलहाल 100 एमएलडी पानी शहर में लाया जा रहा है। इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की योजना है। पुराने और नए स्रोतों को मिलाकर शहर को वर्तमान में प्रतिदिन करीब 223 एमएलडी पानी मिल रहा है। नई जल वाहिनियों के कारण पानी का दबाव बढ़ने से वितरण व्यवस्था में आने वाली रुकावटें कम हुई हैं। इससे उन क्षेत्रों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जहां पर्याप्त दबाव नहीं होने के कारण अंतिम छोर के घरों तक पानी पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ था।
परियोजना के तहत 90 हजार नल कनेक्शन दिए जाने हैं। इनमें से 45 हजार कनेक्शन पूरे हो चुके हैं। करीब 700 किमी आंतरिक जलवाहिनी के काम में लगभग 100 कर्मचारी लगाए गए हैं, जबकि जलकुंभों से जुड़े कार्यों में 160 से 170 कुशल कर्मचारी कार्यरत हैं। परियोजना के शेष काम को गति देने के लिए समय पर भुगतान को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शेष जल वाहिनियों और कनेक्शनों का काम पूरा होने के साथ शहर की जलापूर्ति व्यवस्था में और सुधार की उम्मीद है।
सिडको एन-5, सिडको एन-7, हरसिद्धि माता, मिसारवाड़ी, टीवी सेंटर-3, हिमायतबाग, म्हाडा कॉलोनी, हरिओमनगर, शिवाजी नगर, पुंडलिक नगर, पारिजात नगर, केटली गार्डन, नक्षत्रवाड़ी, हिंदुस्तान आवास, प्रतापनगर, हर्सूल जेल और हर्सूल जलशोधन केंद्र से जुड़े जलकुंभों के माध्यम से नई वितरण व्यवस्था को विस्तार दिया जा रहा है।
सीधा असर: छह दिन के अंतराल से जूझ रहे शहर के कई इलाकों में अब तीन से चार दिन के अंतराल पर पानी पहुंचना शुरू हुआ है। हालांकि पूरे शहर को समान अंतराल पर पानी मिलने के लिए परियोजना के शेष काम पूरे होना जरूरी है।