उद्योग मंत्री डॉ. उदय सामंत (डिजाइन फोटो)
चंद्रपुर

MIDC की जमीन पर नहीं लगाया उद्योग तो होगी कार्रवाई, वर्षों से प्लॉटों को उपयोग न करने वाले हो जाएं सावधान...

MIDC Unused Industrial Plots: चंद्रपुर में वर्षों से खाली पड़े MIDC भूखंडों की जांच शुरू होगी। राज्यभर में करीब 5,500 एकड़ जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू है, ताकि नए उद्योगों को जमीन मिल सके।

आलोक उमाकृष्ण

Chandrapur MIDC Unused Industrial Plots: चंद्रपुर जिले में उद्योग स्थापित करने के लिए महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (एमआईडीसी) से रियायती दरों पर भूखंड लेने के बाद वर्षों तक उनका उपयोग नहीं करने वालों पर अब कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।

राज्यभर में करीब 5,500 एकड़ खाली पड़ी औद्योगिक जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। चंद्रपुर जिले में भी इस दिशा में प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिले की विभिन्न औद्योगिक वसाहतों में कई उद्योग संचालित हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर एमआईडीसी के भूखंडों का अपेक्षित औद्योगिक उपयोग नहीं हुआ है।

उद्योग मंत्री ने दिए ऑडर

उद्योग मंत्री डॉ. उदय सामंत ने चंद्रपुर में हुई समीक्षा बैठक के दौरान वर्षों से बिना उपयोग पड़े एमआईडीसी भूखंडों को वापस लेने के निर्देश दिए हैं। एक और नए उद्योगों के लिए भूखंडों की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पहले से आवंटित जमीन खाली पड़ी होने के कारण औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर सवाल उठ रहे हैं।

ऐसे में उद्योग शुरू नहीं करने अथवा लंबे समय से उत्पादन बंद रखने वाली इकाइयों के भूखंडों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। उद्योग स्थापित करने में पूंजी की कमी, बढ़ता कर्ज, बाजार में उतार-चढ़ाव, कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और विभिन्न अनुमतियों जैसी समस्याएं बाधा बन सकती हैं। हालांकि, यदि इन कारणों से उद्योग शुरू करना संभव नहीं है तो एमआईडीसी के पास भूखंड वापस करने की

स्वतंत्र प्रक्रिया उपलब्ध है।

एमआईडीसी से उद्योग स्थापित करने के लिए भूखंड लेने के बावजूद उनका अपेक्षित उपयोग नहीं करने वाले भूखंडधारकों पर अब कार्रवाई की जाएगी। राज्यभर में ऐसे खाली पड़े भूखंडों की जांच कर जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। चंद्रपुर जिले में भी ऐसे भूखंडों की छानबीन शुरू होने की जानकारी है।

बंद इकाइयों के भूखंडों की भी होगी जांच

उद्योग स्थापित होने के बाद भी आर्थिक संकट, बाजार में बदलाव, न्यायालयीन मामले अथवा अन्य कारणों से कुछ इकाइयों बंद हो जाती है। ऐसी बंद इकाइयों की भी जांच कर उनके भूखंड के भविष्य में उपयोग को लेकर एमआईडीसी निर्णय ले सकता है।

चंद्रपुर के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नए उद्योगों को तत्काल भूखंड उपलब्ध कराने की मांग जोर पकड़ रही है। नए उद्योग स्थापित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में लंबे समय से खाली पड़े एमआईडीसी भूखंडों को वापस लेकर नए उद्यमियों को उपलब्ध कराने की कवायद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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