अल नीनो का असर! बारिश के बावजूद प्यासे रहे बांध, चंद्रपुर जिले में जलसंकट की आशंका, इराई बांध 69% पर अटका

Dams Low Water Storage: चंद्रपुर में अगस्त के पहले सप्ताह तक एक भी जलाशय पूरी तरह नहीं भरा। अल नीनो के प्रभाव और अनियमित बारिश से जलसंकट की आशंका, इराई बांध भी सिर्फ 69% भरा।
Chandrapur Dams Water Low Storage EL Nino
चंद्रपुर में जल संकट(सोर्स: AI)
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Chandrapur Dams Low Water Storage: चंद्रपुर के जिले में पिछले कई सालों बाद यह पहला अवसर है कि, अगस्त माह में भी जिले का एक भी जलाशय शत-प्रतिशत नहीं भरा है। जिले में पिछले दिनों हुई अतिवर्षों के बावजूद जिले के सभी जलाशय प्यासे ही है और उन्हें अब भी अच्छी बारिश की प्रतीक्षा है।

मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार इस बार देश के अन्य क्षेत्रों के साथ ही जिले में भी अल नीनो का प्रभाव हो सकता है, जिससे जिले में बारिश अनियमित रहने का अनुमान जताया जा रहा था। जिले में जून माह मानसून के बगैर ही गुजरा और जुलाई माह बीतने को था कि, इस माह के अंतिम सप्ताह में जिले में मानसून ने जोरदार दस्तक दी।

नदियों का जलस्तर बढ़ा

जिले की तथा जिले के बाहरी क्षेत्रों से गुजरने वाली सभी नदियों का जलस्तर बढ़ गया और उसके कारण जिले के कुछ तटीय हिस्सों में बाढ़ की निर्माण हुई। उम्मीद जताई जा रही थी कि, जिले में पिछले सप्ताह हुई धमाकेदार बारिश के बाद जिले के सभी जलाशयों की स्थिति में सुधार होकर वे या तो लबालब होंगे या फिर ओवरफ्लो की स्थिति तक पहुंचेंगे।

किंतु आंकड़े बताते है कि, जिले के सभी जलाशय अब भी प्यासे ही है। जिले में कुल 10 जलाशय है जिनमे अमलनाला, घोड़ाझरी, नलेश्वर, चंदई, चारगांव, लभनसराड़, असोलमेंढा, पकडीगुड्डम, डोंगरगांव और इराई का समावेश है। आम तौर पर यह सभी जलाशय जुलाई माह के अंत तक या तो शत-प्रतिशत भर जाते है या फिर उनमें 75 प्रतिशत से अधिक जलभंडारण हो जाता है। इस बार यह स्थिति अपवादात्मक रही है।

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पिछले साल के मुकाबले इस साल

अगस्त माह के पहले सप्ताह तक जिले में सिर्फ 2 ही जलाशय ऐसे है जो 75 प्रतिशत से अधिक जलभंडारण करने में सफल रहे हैं, उनमें डोंगरगांव और चारगांव का समावेश है। शेष जलाशयों में घोड़ाझरी 29 प्रतिशत, नलेश्वर 42, चंदई 51, लभनसराड़ 59, असोलमेंढा 48, पकडीगुड्डम 72 प्रतिशत भर चुके है। उल्लेखनीय है कि, पिछले वर्ष जुलाई माह के अंत तक उक्त जलाशयों में से नलेश्वर, चंदई, चारगांव और लभनसराड़ शतप्रतिशत भर चुके थे।

घोड़ाझरी भी 95 प्रतिशत भर चुका था। बाकी जलाशयों की स्थिति भी 70 प्रतिशत से अधिक या इसके करीब-करीब थी। चंद्रपुर शहर को पेयजलापूर्ति करने वाले साथ ही महाजेनको के स्थानीय बिजलीघर में बिजली उत्पादन के लिए काम में आने वाले इराई बांध की वर्तमान स्थिति भी पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले उतनी ठीक नहीं है। यह बांध फिलहाल 69 प्रतिशत ही भर चुका है, जबकि पिछले वर्ष इसी तारीख तक यह बांध 75 प्रतिशत से अधिक भर चुका था।

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