इरई और झरपट नदी के गहराईकरण तथा बाढ़ नियंत्रण  सोर्स- सोशल मीडिया
चंद्रपुर

चंद्रपुर बाढ़ नियंत्रण पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- हलफनामे से नहीं चलेगा काम, मौके पर जाकर होगी जांच

Bombay High Court: चंद्रपुर में इरई और झरपट नदी के गहराईकरण व बाढ़ नियंत्रण कार्यों पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई। प्रशासन के दावों का अब संयुक्त प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाएगा।

प्रमोद यादव

Chandrapur Flood Control Bombay High Court: चंद्रपुर शहर में इरई और झरपट नदियों के गहराईकरण तथा बाढ़ नियंत्रण के लिए किए गए उपायों को लेकर जिला प्रशासन के दावों पर अब न्यायालय ने भी सवाल उठाए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल प्रतिज्ञापत्र दाखिल करने से बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता। प्रशासन ने जिन कार्यों को पूरा करने का दावा किया है, उनकी वास्तविक स्थिति की मौके पर जाकर जांच जरूरी है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में बताया गया कि जिला प्रशासन ने अपने प्रतिज्ञापत्रों में नदी गहराईकरण समेत बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभिन्न कार्य किए जाने की जानकारी दी है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का दावा है कि प्रशासन के दस्तावेजों में बताई गई स्थिति और वास्तविक जमीनी स्थिति में अंतर है। इन दावों को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने संबंधित कार्यों का प्रत्यक्ष संयुक्त निरीक्षण कराने का निर्देश दिया।

प्रशासन के दावों की होगी मौके पर जांच

न्यायालय ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि 25 जनवरी 2025 और 17 फरवरी 2026 को दाखिल किए गए प्रतिज्ञापत्रों में जिन कार्यों का उल्लेख किया गया है, उनका स्थल पर जाकर निरीक्षण कराया जाए। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रशासन द्वारा जिन उपायों को पूरा किए जाने की जानकारी अदालत को दी गई है, वे वास्तव में जमीन पर कितने प्रभावी और मौजूद हैं।

संयुक्त निरीक्षण के दौरान सभी संबंधित पक्षों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इससे निरीक्षण की प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और मौके की वास्तविक स्थिति अदालत के सामने लाने में मदद मिलेगी।

48 घंटे पहले देनी होगी लिखित सूचना

अदालत ने निरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट व्यवस्था भी तय की है। जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से संयुक्त निरीक्षण की जानकारी संबंधित पक्षों को कम से कम 48 घंटे पहले लिखित रूप से देना अनिवार्य होगा।

निरीक्षण के दौरान याचिकाकर्ताओं के प्रतिनिधि, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) के प्रतिनिधि और जिलाधिकारी कार्यालय के संबंधित जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इस दौरान प्रतिज्ञापत्रों में बताए गए नदी गहराईकरण और बाढ़ नियंत्रण से संबंधित कार्यों की मौके पर स्थिति देखी जाएगी।

दोनों नदियों से जुड़ा है मामला

चंद्रपुर शहर में इरई और झरपट नदियों के कारण बारिश के मौसम में बाढ़ और जलभराव की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है। ऐसे में नदी की गहराई बढ़ाने और बाढ़ नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपायों की प्रभावशीलता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब अदालत के आदेश के बाद प्रशासन द्वारा किए गए कार्यों का जमीनी सत्यापन होगा।

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शंतनू भांडारकर ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता एएम कड़कर उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता एएस जायसवाल के साथ अधिवक्ता एनजी मोहरीर, अधिवक्ता पीबी पाटिल और अधिवक्ता महेश धात्रक ने भी मामले में पक्ष रखा।

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