दिल्ली AIIMS में 15 साल की तन्वी ने तोड़ा दम, परिवार ने डॉक्टर्स पर लगाए आरोप, FIR और नार्को टेस्ट की मांग

Delhi AIIMS Tanvi Case: दिल्ली AIIMS में 15 साल की तन्वी की मौत के बाद परिवार ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए। AIIMS ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई है।
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दिल्ली AIIMS में तन्वी की मौतसौजन्य-सोशल मीडिया
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Delhi AIIMS Tanvi Death Case: दिल्ली AIIMS से एक 15 साल की मासूम की मौत की खबर सामने आई है। 13 साल से बच्ची के इलाज के लिए चक्कर काट रहे परिवार की दौड़ मासूम की मौत के साथ खत्म हो गई। मेरी बेटी शुरुआत में इतनी गंभीर स्थिति में नहीं थी। अगर समय पर डॉक्टरों ने सही कदम उठाया होता और लापरवाही न बरती होती, तो आज मेरी बच्ची तन्वी मेरे सामने हंस-खेल रही होती।

यह दर्द है उस बदहवास मां भाविका परियानी का, जिसने दिल्ली AIIMS में 13 सालों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अपनी 15 साल की मासूम बेटी तन्वी को खो दिया। फफक-फफक कर रोती मां ने बताया कि उन्होंने अपनी गुहार लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से भी उन्हें वह मदद नहीं मिल सकी, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।

राजस्थान के कोटा निवासी परियानी परिवार वर्ष 2012 से अपनी बच्ची के दिल की बीमारी का इलाज कराने के लिए दिल्ली AIIMS के चक्कर काट रहा था। मृतका के पिता मुकेश परियानी ने आरोप लगाया कि 13 वर्षों में अनगिनत टेस्ट के बावजूद, जिस हार्ट सर्जरी से उनकी बेटी की जान बचाई जा सकती थी, उसे डॉक्टर टालते रहे। चिकित्सीय देरी के कारण बच्ची ने दम तोड़ दिया।

बवाल के बाद संस्थान ने गठित की जांच समिति

तन्वी की मौत की घटना गरमाने और गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद AIIMS, दिल्ली के निदेशक ने मामले का संज्ञान लिया है। AIIMS प्रशासन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करने, इलाज के दौरान हुई देरी की जांच करने और वास्तविक तथ्यों का पता लगाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया गया है।

तन्वी के पिता कर रहे इंसाफ की मांग

तन्वी के पिता मुकेश परियानी ने बताया कि हम 13 वर्ष तक इस उम्मीद में दिल्ली AIIMS के चक्कर काटते रहे कि हमारी बच्ची ठीक हो जाएगी, लेकिन हमें क्या मिला, अपनी मासूम बेटी की लाश। हम अंतिम सास तक AIIMS प्रबंधन की लापरवाही के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे, ताकि किसी और के बच्चों के साथ ऐसा हादसा न हो।

दिल्ली AIIMS में इलाज में कथित देरी की वजह से 15 साल की एक लड़की की मौत के मामले में, उसके पिता मुकेश परियानी ने बताया, कि मैं अपनी बेटी के इलाज के लिए AIIMS दिल्ली आया था। मैं पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को OPD गया था। उसके बाद, मैं रूम नंबर 14 में गया। वहां से मुझे रूम नंबर 18 में भेजा गया। डॉ. कोठारी ने कुछ शुरुआती टेस्ट और जांच कीं। इस प्रक्रिया में लगभग एक साल लग गया।

पीएमओ से की शिकायत

तन्वी के पिता ने आगे बताया कि फिर, मुझे रूम नंबर 4 में डॉ. सचिन तलवार के पास भेजा गया। डॉ. सचिन तलवार ने मुझे पैसे और खून जमा करने के लिए कहा और भरोसा दिलाया कि वे ऑपरेशन करेंगे। मैंने 4 अप्रैल 2014 को खून और पैसे जमा कर दिए। OPD विजिट के बाद, मुझे ऑपरेशन के लिए एक तारीख दी गई। जब मैं 2 सितंबर 2015 को गया, तो मुझे बताया गया कि ऑपरेशन दिवाली के बाद होगा।

मैंने 4 जनवरी के बाद उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मुझे टालमटोल का सामना करना पड़ा। वे कहते रहे कि ऑपरेशन अभी नहीं होगा और उसे टालते रहे। उसके बाद, एक और OPD विजिट के बाद, मैंने PMO में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

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शिकायत दर्ज होने के बाद, हमें अस्पताल से फोन आया कि हम आ जाएं ताकि सर्जरी की जा सके। डॉ. सचिन तलवार ने हमें बुलाया लेकिन फिर ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि जब तक शिकायत वापस नहीं ली जाती, वे आगे नहीं बढ़ेंगे।

हमने कई चक्कर लगाए, लेकिन वे हमें टालते रहे, यह कहते हुए कि वे बाद में करेंगे और हमें किसी और समय आने के लिए कहते रहे। 2018 में, हमें जरूरी टेस्ट करवाने के लिए कहा गया। जांच के बावजूद, हमें कोई जवाब नहीं मिला, और न ही हमें बीमारी की प्रकृति के बारे में बताया गया।

डॉक्टर्स ने ऑपरेशन से किया इनकार

मुकेश परियानी ने कहा कि वे 2023 में फिर गए, लेकिन उन्होंने ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया। फिर, 2025 में, हमने फिर से शिकायत दर्ज कराई। फिर हमें 28 जुलाई 2025 को आने के लिए कहा गया। जब हम गए, तो डॉक्टर छुट्टी पर थे। उन्होंने फिर कहा कि बच्ची सिर्फ दवा से ठीक हो जाएगी और उसे कोई समस्या नहीं है, और उन्होंने हमें बस ऐसे ही वापस भेज दिया। दवा लिखे जाने के बाद OPD कार्ड को लेकर मैंने 9 फरवरी, 2026 को फोन किया और शिकायत दर्ज कराई।

वे बस टेस्ट करते रहे, लेकिन ऑपरेशन कभी नहीं हुआ। वे सिर्फ टेस्ट ही करते रहे और मेरी बच्ची गुजर गयी। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? अगर मेरी बेटी का ऑपरेशन 2015, 2016 या 2017 में हो सकता था और वह ठीक हो सकती थी, तो उन्होंने ऑपरेशन क्यों नहीं किया? मैं चाहती हूं कि सख्त से सख्त कार्रवाई हो। मैं जांच की मांग करता हूं। मुझे न्याय चाहिए।

FIR व नार्को टेस्ट की मांग

बेटी का अंतिम संस्कार करने के बाद अब पीड़ित परिवार ने हार मानने से इनकार कर दिया है। पिता मुकेश ने इलाज में शामिल डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज कराने और सच सामने लाने उनका नार्को टेस्ट कराने की मांग की है।

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