Ramai Housing Beneficiary Probe: छत्रपति संभाजीनगर में रमाई आवास योजना में कथित फर्जी लाभार्थियों को शामिल किए जाने के आरोपों के बाद महानगरपालिका (मनपा) ने बड़े स्तर पर जांच शुरू कर दी है। मनपा 425 मामलों की जांच कर रही है, जिनमें से 424 आवेदनों में आवश्यक दस्तावेज अधूरे पाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि हर आवेदन की अलग-अलग जांच की जा रही है, ताकि केवल पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ मिल सके।
मनपा आयुक्त अमोल येड़गे ने बताया कि योजना में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पूरी प्रक्रिया को अब ऑनलाइन कर दिया गया है। राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग की इस योजना के तहत अनुसूचित जाति और नवबौद्ध वर्ग के शहरी परिवारों को 325 वर्ग फीट का घर बनाने के लिए 2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना के लिए 30 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मनपा ने एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) नियुक्त किया है। एजेंसी को आवेदनों की जांच, स्थल निरीक्षण, भवन का नक्शा तैयार करने और चरणबद्ध तरीके से अनुदान जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हालांकि, योजना में फर्जी लाभार्थियों को शामिल कर वास्तविक जरूरतमंदों को वंचित किए जाने के आरोप लगातार लगते रहे हैं। पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नाम पर कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने का आरोप लगाते हुए कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। इसके बाद विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक अंबादास दानवे ने भी यह मुद्दा सदन में उठाया।
इन आरोपों के बाद मनपा ने योजना के सभी पुराने मामलों की दोबारा जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत सत्यापन के बाद ही पात्र लाभार्थियों को अनुदान दिया जाएगा। छत्रपति संभाजीनगर मनपा को उम्मीद है कि ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने से योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी।