लाइसेंस खत्म होने के बाद भी बेची दवाएं, हेल्थकेयर कंपनी के निदेशक को 3 साल की सजा

Illegal Drug Sales: संभाजीनगर में लाइसेंस समाप्त होने के बाद भी दवाओं की बिक्री करने के मामले में कंपनी निदेशक को 3 साल के कठोर कारावास और 31.81 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
Healthcare company director sentenced to 3 years for selling medicines after license expiry.
संभाजीनगर एफडीए, दवा लाइसेंस, (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar Expired Drug License Case: छत्रपति संभाजीनगर में थोक दवा बिक्री का लाइसेंस समाप्त होने के बावजूद करीब एक वर्ष तक अवैध रूप से दवाओं का भंडारण, बिक्री और वितरण करने के मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर.एस. पवास्कर ने मेडिना ग्लिंट हेल्थकेयर प्रा. लि. के निदेशक अनिल कांबले को 3 वर्ष के कठोर कारावास और 31.81 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने कंपनी पर भी 31.81 लाख रुपये का अलग जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर 6 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

बिना लाइसेंस दवा कारोबार, निदेशक दोषी

यह मामला खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की औषधि निरीक्षक अंजली मंगलप्पा मिटकर की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, 30 मई 2024 को पड़ेगांव स्थित कंपनी के परिसर का निरीक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि कंपनी का फॉर्म 20-बी और 21-बी थोक दवा बिक्री लाइसेंस 20 अप्रैल 2023 को ही समाप्त हो चुका था। पूछताछ में निदेशक अनिल कांबले ने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराने की बात स्वीकार की।

जीएसटी और बैंक रिकॉर्ड बने अहम सबूत

एफडीए ने जांच के दौरान जीएसटी चालान, खरीद-बिक्री के दस्तावेज और बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड जब्त किए। जांच में सामने आया कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक कंपनी ने लाइसेंस समाप्त होने के बावजूद विभिन्न ग्राहकों को दवाओं की बिक्री और आपूर्ति जारी रखी।

सुनवाई के दौरान सहायक लोक अभियोजक उल्हास पवार ने पंचनामा, लाइसेंस की प्रतियां, जीएसटी रिकॉर्ड, आरोपी का बयान और सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट अदालत में पेश की। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अनिल कांबले को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 18(सी) के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

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