2008 दिल्ली ब्लास्ट के आरोपी साकिब निसार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जमानत याचिका हुई खारिज

2008 Delhi Blasts: 16 साल से जेल में बंद इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकी साकिब निसार की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को 6 महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया।
Supreme Court of India building in New Delhi
सुप्रीम कोर्ट सोर्स- सोशल मीडिया
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Saquib Nisar Bail petition Dismissed: साल 2008 के दिल्ली सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहा है। देश की शीर्ष अदालत ने इस भीषण आतंकी हमले के मुख्य आरोपी और प्रतिबंधित संगठन 'इंडियन मुजाहिदीन' (IM) के संदिग्ध आतंकवादी साकिब निसार की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पिछले 16 सालों से सलाखों के पीछे बंद साकिब निसार को सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े फैसले से बहुत बड़ा झटका लगा है।

जमानत देने से साफ इंकार

इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्तित एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की खंडपीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने साकिब निसार को फिलहाल किसी भी प्रकार की राहत या जमानत देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की ट्रायल कोर्ट के लिए एक सख्त समय सीमा तय की है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को सख्त निर्देश दिया है कि साकिब निसार के खिलाफ चल रहे इस मुकदमे की सुनवाई को अगले छह महीने के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि यदि अगले छह महीनों में मुकदमा पूरा नहीं होता है, तो आरोपी की जमानत याचिका पर दोबारा विचार किया जा सकता है।

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आखिर क्यों 16 साल से अधर में लटका है यह मुकदमा?

संदिग्ध आतंकी साकिब निसार को पुलिस ने अक्टूबर 2008 में गिरफ्तार किया था और वह पिछले 16 सालों से लगातार हिरासत में ही है। इस साल जनवरी में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि छह महीने के भीतर मुकदमा पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन इस तय अवधि में भी ट्रायल पूरा न हो पाने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने अब कड़ा रुख अपनाया है और ट्रायल कोर्ट को 6 महीने की आखिरी समय सीमा दे दी है। आरोपी निसार के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की बेहद गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है।

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13 सितंबर 2008 का वह काला दिन: जब दहल उठी थी देश की राजधानी

यह पूरा मामला 13 सितंबर 2008 का है, जब देश की राजधानी दिल्ली सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल उठी थी। आतंकियों ने दिल्ली के सबसे व्यस्त और वीआईपी इलाकों, करोल बाग, कनॉट प्लेस और ग्रेटर कैलाश को निशाना बनाया था। इस कायरतापूर्ण आतंकी हमले में 26 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी, जबकि 135 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। धमाकों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तीन जिंदा बमों को भी बरामद किया था, जिन्हें समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया था।

ईमेल भेजकर ली थी धमाकों की जिम्मेदारी

इन भीषण धमाकों के तुरंत बाद आतंकी संगठन 'इंडियन मुजाहिदीन' ने मीडिया को एक ईमेल भेजकर इन सिलसिलेवार हमलों की पूरी जिम्मेदारी ली थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अक्टूबर 2008 में संदिग्ध आतंकी साकिब निसार को धर दबोचा था। अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद उम्मीद की जा रही है कि पिछले 16 सालों से खिंच रहे इस मुकदमे में अगले छह महीनों के भीतर अंतिम फैसला आ जाएगा।

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