AIMIM नेता इम्तियाज जलील का बड़ा बयान, मराठी अनिवार्य हो, पर भाषा के नाम पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं

Imtiaz Jaleel Statement: नवी मुंबई में इम्तियाज जलील ने कहा कि मुस्लिमों को रोजगार के लिए मराठी सीखनी चाहिए। उन्होंने मराठी को अनिवार्य बनाने का समर्थन किया लेकिन भाषा के नाम पर हिंसा की निंदा की।
AIMIM Leader Imtiaz Jaleel Issues Major Statement: Marathi Must Be Made Mandatory, But Hooliganism in the Name of Language Will Not Be Tolerated
इम्तियाज जलील (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Imtiaz Jaleel Supports Marathi Language: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद सैयद इम्तियाज जलील ने मराठी भाषा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संतुलित बयान दिया है। नवी मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जलील ने स्पष्ट रूप से कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर नागरिक को स्थानीय भाषा यानी मराठी का ज्ञान होना न केवल गर्व की बात है, बल्कि यह भविष्य की अनिवार्य जरूरत भी है।

मुस्लिम समाज और युवाओं को संदेश

इम्तियाज जलील (Imtiaz Jaleel) ने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के अभिभावकों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें मराठी भाषा को किसी धार्मिक या जातीय चश्मे से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा, "यदि कल आपका बच्चा प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) में बैठना चाहता है या राज्य सरकार में नौकरी पाना चाहता है, तो मराठी का ज्ञान होना उसके लिए अनिवार्य (Must) है।" जलील के अनुसार, स्थानीय भाषा की समझ रोजगार के अवसरों के द्वार खोलती है और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने में मदद करती है।

अनिवार्यता का समर्थन, लेकिन जबरदस्ती पर चेतावनी

इम्तियाज जलील (Imtiaz Jaleel) ने जहाँ एक ओर स्कूलों और सरकारी कामकाज में मराठी को अनिवार्य करने के विचार का पुरजोर समर्थन किया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने भाषा के नाम पर होने वाली राजनीति और जबरदस्ती पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, हमें मराठी पर अभिमान है और हम इसके समर्थन में हैं, लेकिन इसे थोपा नहीं जाना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आप 8 दिन का समय दें और 9वें दिन से अपनी गुंडागर्दी शुरू कर दें।

उनका इशारा उन राजनीतिक संगठनों की ओर था जो अक्सर दुकानों के साइनबोर्ड या भाषा के मुद्दे पर हिंसक प्रदर्शन करते हैं। जलील ने स्पष्ट किया कि भाषा सीखने की एक प्रक्रिया होती है और इसे प्यार व सम्मान के साथ सिखाया जाना चाहिए, न कि भय या हिंसा के दम पर।

जाति और धर्म से ऊपर है भाषा

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने अपील की कि भाषा को केवल एक संवाद के माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि "मराठी हमारी अपनी भाषा है, हम इसी मिट्टी में रहते हैं, इसलिए हमें इसे जानना ही चाहिए।" उनके इस बयान को महाराष्ट्र की राजनीति में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने भाषा के मुद्दे को सीधे तौर पर आर्थिक विकास और करियर से जोड़ दिया है। नवी मुंबई की इस सभा में जलील के इस रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में AIMIM महाराष्ट्र में अपनी छवि को केवल एक 'धार्मिक दल' से बदलकर एक क्षेत्रीय हितैषी दल के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।

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