नवनीत राणा (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
अमरावती

जिसका किया प्रचार, वहीं बनेगा उपमहापौर, अमरावती में नवनीत राणा का जलवा! 24 घंटे में बदले समीकरण

Amravati Deputy Mayor: अमरावती महानगरपालिका में एक बार फिर नवनीत राणा का जादू चल गया। मनपा में उपमहापौर पद के लिए अब सियासी समीकरण 24 घंटे में बदल गए।

प्रिया जैस

Navneet Rana Amravati: अमरावती मनपा के उपमहापौर पद के चुनाव में पूर्व सांसद नवनीत राणा द्वारा प्रचार किए गए उम्मीदवार को उपमहापौर पद के लिए नामित किया गया है। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि नवनीत राणा ने चुनाव से पहले इस उम्मीदवार के लिए सक्रिय रूप से प्रचार किया था।

अब वही उम्मीदवार उपमहापौर पद के लिए नामित किए गए हैं, जिससे यह माना जा रहा है कि राणा का प्रभाव फिर से सिद्ध हो गया है। पूर्व सांसद नवनीत राणा ने 4 जनवरी को भाजपा के प्रचार रैली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के रोड शो में भाग लिया था। इस दौरान नवनित राणा ने भाजपा के पक्ष में जमकर प्रचार किया और डबल इंजन सरकार, विकास का राजकारण और भक्कम नेतृत्व की बातें कीं।

हालांकि, 24 घंटे के भीतर ही नवनीत राणा ने रवि राणा के युवा स्वाभिमान पार्टी के उम्मीदवार सचिन भेंडे के लिए भाजपा के खिलाफ प्रचार किया। इस बदलती रणनीति ने अमरावती में राजनितिक चर्चा को हवा दी थी। लेकिन अब वही उम्मीदवार उपमहापौर पद के लिए चुने गए हैं, जिससे नवनीत राणा का प्रभाव और रणनीति एक बार फिर साबित हो गई है।

विरोधी दलों का आरोप

विरोधी दलों ने इस उपमहापौर पद की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, उनका आरोप है कि यह निर्णय राजनीतिक दबाव के तहत लिया गया है। उनके अनुसार महापालिका के आगामी राजनीतिक समीकरण और विकास की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

उपमहापौर पद के लिए प्रचार

नवनीत राणा ने महापालिका चुनाव में महापौर पद के उम्मीदवार श्रीचंद तेजवानी के खिलाफ पुरुषोत्तम बजाज का प्रचार किया था। इसके अलावा आशीष अतकरे के खिलाफ उन्होंने राजा बांगडे का खुला प्रचार किया था। युवा स्वाभिमान ने भाजपा के कई उम्मीदवारों को पराजित किया था, जिससे भाजपा में भारी असंतोष था।

वर्तमान में, महापालिका में भाजपा ने 15 सीटे प्राप्त युवा स्वाभिमान पार्टी को करीब किया। हालांकि भाजपा ने श्रीचंद तेजवानी और आशीष अतकरे के नाम महापौर के लिए घोषित कर, राणा दंपत्ति को एक राजनीतिक संदेश दिया है कि भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ कोई भी कृति सहन नहीं की जाएंगी।

भाजपा ने राष्ट्रवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके अपने राजनीतिक दबदबे को मजबूत किया है। उपमहापौर के चुनाव में राष्ट्रवादी को स्थायी समिति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की संभावना जताई जा रही है। इसके माध्यम से भाजपा ने राणा दंपत्ति पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है, राष्ट्रवादी को अपने साथ लाकर उनके खिलाफ राजनीतिक चालें चली हैं।

महापालिका में संख्याबल का खेल

महानगरपालिका में भाजपा ने 25 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा किया है, लेकिन अब बहुमत प्राप्त करने के लिए उन्हें सहयोगियों की जरूरत महसूस हो रही है। राष्ट्रवादी के 11 सदस्य भाजपा के महायुती का हिस्सा बन चुके हैं, जिससे भाजपा, राकांपा और युवा स्वाभिमान ऐसा कुल संख्याबल अब 51 पर पहुंच गया है, जबकि बहुमत के लिए 44 सीटों की आवश्यकता है।

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