अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

चीनी मिल को-ऑपरेटिव पॉलिटिक्स का सुल्तान कौन? अजित पवार के निधन के बाद इन 5 मोर्चों पर छिड़ा वर्चस्व का संग्राम

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन ने राज्य की राजनीति को 360 डिग्री घुमा दिया है। वित्त मंत्रालय से लेकर सहकारी लॉबी तक, अब नेतृत्व का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

आकाश मसने

Maharashtra Politics After Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता और 'दादा' के नाम से मशहूर अजित पवार के निधन ने न केवल पवार परिवार, बल्कि पूरी महायुति सरकार को हिलाकर रख दिया है। बारामती में उन्हें अंतिम विदाई दी गई, लेकिन उनके पीछे छूटे राजनीतिक सवालों का जवाब अब भी भविष्य के गर्भ में है।

महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार को उनके पैतृक क्षेत्र बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस शोक की घड़ी में राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे जैसी दिग्गज हस्तियां उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। छह बार उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार के जाने से महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में एक गहरा झटका लगा है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में कठिन नजर आती है। अजित पवार के बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी, जिसके बाद वह पंचतत्व में विलीन हो गए।

NCP की कमान और विरासत की जंग

अजित पवार के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का भविष्य क्या होगा? वर्तमान में प्रफुल्ल पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और उत्तराधिकारी की तलाश पूरी होने तक कमान उनके हाथों में रहने की उम्मीद है।, हालांकि, सुनील तटकरे का संगठन पर अच्छा नियंत्रण है और छगन भुजबल व धनंजय मुंडे जैसे ओबीसी चेहरे भी लोकप्रिय हैं, लेकिन राज्यव्यापी प्रभाव के मामले में चुनौतियां बरकरार हैं। वहीं, पवार परिवार की एकजुटता पर भी सबकी नजरें हैं; क्या सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार शरद पवार के साथ फिर से हाथ मिलाएंगे? अजित पवार के रहते हुए परिवार के रिश्तों की कड़वाहट कम होने लगी थी, लेकिन अब नेतृत्व का संकट पार्टी को नई दिशा में ले जा सकता है।

महाराष्ट्र का वित्त मंत्री कौन होगा?

अजित पवार के निधन का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती भी बन गया है। महाराष्ट्र का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने वाला है और मार्च के पहले सप्ताह में बजट पेश किया जाना है। अजित पवार इस साल अपना 12वां बजट पेश करने की तैयारी में थे। अब सरकार के सामने सवाल यह है कि इतना महत्वपूर्ण और शक्तिशाली विभाग किसे सौंपा जाए? क्या यह पद NCP के पास ही रहेगा या महायुति के किसी अन्य घटक दल के पास जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

मराठा राजनीति किस ओर करवट लेगी?

अजित पवार महाराष्ट्र में मराठा समुदाय का एक प्रमुख चेहरा थे। उनके जाने से मराठा राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। वर्तमान में मराठा राजनीति कई गुटों में बंटी हुई है, जिसमें पवार परिवार की पकड़ सबसे मजबूत रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए अब ब्राह्मण और मराठा समुदायों के बीच राजनीतिक तालमेल बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी, विशेषकर तब जब उद्धव और राज ठाकरे मराठी अस्मिता के मुद्दे पर आक्रामक हैं। अजित पवार की अनुपस्थिति में मराठा आंदोलन के फिर से मुखर होने की संभावना जताई जा रही है।

सहकारी और चीनी मिल लॉबी पर नियंत्रण का संग्राम

महाराष्ट्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राजनीति की धुरी 'सहकारी समितियां' और 'चीनी मिलें' रही हैं। राज्य में 2 लाख से अधिक सहकारी समितियां हैं जो लगभग 7 करोड़ लोगों को प्रभावित करती हैं। अजित पवार ने अपनी राजनीति की शुरुआत इसी कॉपरेटिव सेक्टर से की थी और चीनी मिल लॉबी पर उनका जबरदस्त नियंत्रण था। अब उनके न रहने से इस क्षेत्र में वर्चस्व की जंग छिड़ सकती है। शरद पवार एक बार फिर यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं, जबकि भाजपा भी इस क्षेत्र के जरिए पश्चिमी महाराष्ट्र में अपनी जड़ें जमाने की ताक में है।

कौन होगा महायुति का नया 'तीसरा इंजन'?

2023 से चल रही 'ट्रिपल इंजन' सरकार में अजित पवार एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। हालांकि, उनके गुट के 41 विधायकों के होने से सरकार के बहुमत (145) पर तत्काल कोई खतरा नहीं है, लेकिन उपमुख्यमंत्री की कुर्सी खाली होने से गुटबाजी बढ़ सकती है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल जैसे दिग्गज इस पद के दावेदार हो सकते हैं। भाजपा और शिंदे गुट को अब एनसीपी के भीतर के असंतोष को संभालते हुए गठबंधन के संतुलन को बनाए रखना होगा।

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