कौन बनेगा शुगर मिल का 'बादशाह'? बारामती में अजित बनाम शरद पवार, मालेगांव चीनी मिल चुनाव में डिप्टी सीएम ने डाला वोट

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पुणे जिले के बारामती तहसील में हो रहे मालेगांव शुगर मिल चुनाव में वोट डाला। वह खुद भी चुनाव लड़ रहे हैं। इस चुनाव में उनके सामने शरद पवार का पैनल मैदान में है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पुणे जिले के बारामती तहसील में हो रहे मालेगांव शुगर फैक्ट्री चुनाव में वोट डाला
शरद पवार व अजित पवार (डिजाइन फोटो)
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पुणे: महाराष्ट्र के एक चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुट एक बार फिर आमने-सामने है। पुणे जिले के बारामती तहसील में मालेगांव शुगर मिल चुनाव के लिए आज वाेटिंग हो रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डाला। वह खुद भी चुनाव लड़ रहे हैं। बारामती में सहकारी चीनी मिल के 21 सदस्यीय निदेशक मंडल के लिए आज मतदान हो रहा है। वहीं इसके परिणाम 24 जून को घोषित किए जाएंगे।

यह चुनाव साधारण नहीं है। इस बार अजित पवार मैदान में हैं, जिन्हें कभी बारामती की सहकारी संस्थाओं का 'बॉस' माना जाता था। अब वे खुद मालेगांव मिल के चेयरमैन पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन उनकी राह इतनी आसान नहीं है, क्योंकि उन्हें उनके ही चाचा शरद पवार चुनौती दे रहे हैं।

डिप्टी सीएम ने किया मतदान

मालेगांव चीनी मिल चुनाव के लिए उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मतदान केंद्र पहुंचकर अपना वोट डाला।

चीनी मिल चुनाव में त्रिकोणीय लड़ाई

अजित पवार 90 उम्मीदवारों में से एक हैं। वह चार दशक से अधिक समय के बाद किसी सहकारी चीनी मिल के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। वह नीलकंठेश्वर पैनल के उम्मीदवार हैं, जो वर्तमान में चीनी मिल को नियंत्रित करता है। उम्मीदवार पार्टी के टिकट पर नहीं बल्कि विभिन्न पैनलों के बैनर तले चुनाव लड़ रहे हैं।

नीलकंठेश्वर पैनल और सहकार बचाओ पैनल के अलावा शरद पवार की अगुआई वाली एनसीपी (एसपी) ने ‘बलिराजा सहकार बचाओ’ पैनल बनाकर मैदान में उतरकर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। शरद पवार सीधे तौर पर मैदान में नहीं हैं। बलिराजा सहकार बचाओ पैनल ने 20 और नीलकंठेश्वर पैनल ने 21 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।

किसान वोटर की अहम भूमिका

मालेगांव चीनी मिल के सदस्य किसान ही इस चुनाव में वोट डालेंगे। इसमें करीब 20,000 किसान शामिल हैं। ये किसान मिल के शेयरहोल्डर भी हैं। ये वोटर ही तय करेंगे कि अगला चेयरमैन कौन होगा। इस मिल का इतिहास ऐसा रहा है कि ये अपने किसानों को अच्छा भुगतान करती है, इसलिए सबकी नजरें इस चुनाव पर टिकी हुई हैं।

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