बाढ़ में जुगाड़ के सहारे ड्रमों पर रखा शव (सोर्स- सोशल मीडिया)
रीवा

बाढ़ की त्रासदी और सिस्टम की लाचारी; रीवा में जुगाड़ के सहारे ड्रमों पर रखकर पार कराया गया शव- देखें VIDEO

Body Transported on Drums Rewa: जवा के रौली गांव में बाढ़ का पानी भरा होने के कारण शव को घर तक ले जाने का नहीं मिला रास्ता, ग्रामीणों ने पानी के बीच से ड्रमों के सहारे पार कराया शव।

अर्पित पाण्डेय, सजल रघुवंशी

Rewa Flood Viral Video: बाढ़ की त्रासदी के बीच रीवा के जवा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत रौली से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक मृतक के शव को घर तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को ड्रम का सहारा लेना पड़ा।

ग्रामीणों ने ड्रमों को आपस में बांधकर उसके ऊपर शव रखा और बाढ़ के पानी को पार कराते हुए शव को घर तक पहुंचाया। इस घटना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों ने जुगाड़ से ड्रमों को बांधकर बनाया अस्थायी तैरने वाला साधन

जानकारी के मुताबिक, रौली निवासी मोतीलाल तिवारी का रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल में निधन हो गया था। अस्पताल से उनका शव गांव स्थित घर लाया गया, लेकिन बाढ़ के पानी के कारण घर तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह बाधित था। ऐसे हालात में परिजनों और ग्रामीणों के सामने शव को घर तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया। आखिरकार ग्रामीणों ने जुगाड़ से ड्रमों को बांधकर एक अस्थायी तैरने वाला साधन तैयार किया। इसी पर शव को रखा गया और ग्रामीणों ने बाढ़ के पानी के बीच से शव को घर तक पहुंचाया। इसके बाद मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।

पंचायत पर मदद से इनकार के आरोप

घटना को लेकर ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शव को घर तक पहुंचाने में मदद के लिए जब महिला सरपंच से संपर्क किया गया, तो कथित तौर पर सरपंच और उनके देवर व जीआरएस विवेक तिवारी ने यह कहते हुए मदद से इनकार कर दिया कि "यह हमारा काम नहीं है।" हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

बाढ़ ने खोली व्यवस्थाओं की पोल

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के चलते पहले ही गांवों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित है। रास्ते और संपर्क मार्ग बंद होने से लोगों को जरूरी सामान, इलाज और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। लेकिन किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके शव को घर और अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाने के लिए भी ग्रामीणों को इस तरह जुगाड़ का सहारा लेना पड़े, यह व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। ड्रम पर शव रखकर बाढ़ का पानी पार कराने की तस्वीर सामने आने के बाद अब सवाल यही है कि आपदा की इस घड़ी में जिम्मेदार तंत्र आखिर कहां खड़ा है और सबसे मुश्किल वक्त में आम लोगों का सहारा कौन बनेगा?

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