Madhya Pradesh Top 10 News Navbharat Live: मध्य प्रदेश में आज विकास योजनाओं से लेकर प्रशासनिक सवालों, बारिश और बाढ़ की मार, राजनीतिक विवादों और पर्यावरण चिंताओं तक कई बड़े घटनाक्रम सामने आए। यहां पर पढ़िए प्रदेश की 10 बड़ी और अहम खबरें।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में “कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की थीम “वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस” रखी गई है। इसका उद्देश्य विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में केंद्रीय संस्थानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को उसकी सामर्थ्य का एहसास कराया है और भारत 2047 के विकसित भारत के विजन की ओर आगे बढ़ रहा है।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि एमपीआईडीसी में कथित लालफीताशाही और कमीशनखोरी के चलते सैकड़ों करोड़ रुपये की परियोजनाएं महीनों से अटकी हुई हैं। निर्माण एजेंसियों का दावा है कि टेंडर आवंटित होने के बावजूद तकनीकी स्वीकृति, साइट सीमांकन और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं आगे नहीं बढ़ीं। कंपनियों की ओर से मुख्य सचिव कार्यालय में शिकायत किए जाने की बात भी सामने आई है।
भोपाल के भारत टॉकीज क्षेत्र स्थित ब्रिज के नीचे बने पटवा मार्केट में बारिश के बाद कई दुकानों में पानी भर गया। सोमवार को हुई बारिश के बाद दुकानों के अंदर पानी घुसने के वीडियो भी सामने आए। अचानक पानी भरने से दुकानदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और वे सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाते नजर आए। दुकानदारों का कहना है कि हर बारिश में यही स्थिति बनती है, लेकिन जलभराव की समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
भोपाल के ऐशबाग इलाके में बने चर्चित 90 डिग्री रेलवे ओवरब्रिज को लेकर राहत की खबर सामने आई है। ब्रिज के खतरनाक मोड़ को सुरक्षित बनाने के लिए सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। लंबे समय से यह मोड़ वाहन चालकों के लिए चुनौती बना हुआ था और इसी वजह से ब्रिज चर्चा में रहा। अब नए डिजाइन के मुताबिक मोड़ में सुधार किया जाएगा, जिससे वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो सकेगी। इससे स्थानीय लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
कैलारस शक्कर मिल को दोबारा शुरू कराने का आंदोलन अब जौरा विधायक पंकज उपाध्याय और मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के बीच बयानबाजी तक पहुंच गया है। कलेक्टर के उस बयान पर विधायक ने नाराजगी जताई, जिसमें कहा गया था कि मिल चालू करने का फैसला उनके अनशन से पहले ही हो चुका था। विधायक ने कलेक्टर को पत्र लिखकर खेद व्यक्त करने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर विधानसभा में विशेषाधिकार हनन और न्यायालय में मानहानि का दावा करने की चेतावनी दी है।
रीवा के जवा जनपद की ग्राम पंचायत रौली से बाढ़ के बीच इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक मृतक के शव को घर तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को ड्रम का सहारा लेना पड़ा। ग्रामीणों ने कई ड्रमों को आपस में बांधा और उसके ऊपर शव रखकर बाढ़ के पानी को पार कराया। इसके बाद शव को घर तक पहुंचाया गया। इस घटना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं और राहत इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भिंड जिले के ग्राम पंचायत बबेड़ी क्षेत्र में बारिश के दौरान शिक्षक और छात्र जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं। बैसली नदी के उफान पर आने से कई गांवों का संपर्क मुख्य रास्तों से कट जाता है। ऐसे में शिक्षक ई-अटेंडेंस के लिए ट्यूब के सहारे नदी और नालों को पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं। नदरौली और सुमेर सिंह का पुरा सहित कई गांवों के रास्ते जलभराव के कारण बंद हो जाते हैं। ग्रामीणों की मदद से शिक्षक ट्यूब पर बैठकर नदी पार करते हैं।
जबलपुर में परियट, गौर और हिरन नदियों को प्रदूषण से बचाने की मांग तेज हो गई है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नदी किनारे संचालित डेयरियों को हटाकर निर्धारित डेयरी स्टेट में शिफ्ट करने की मांग की है। मंच का आरोप है कि डेयरियों से निकलने वाला गोबर, गंदा पानी और अन्य अपशिष्ट नदियों को प्रदूषित कर रहे हैं। इन नदियों का पानी आगे नर्मदा में मिलता है, जिससे नर्मदा के प्रदूषण को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
जबलपुर के 13 वर्षीय शाश्वत राजपूत ने छोटी उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले शाश्वत ने सस्पेंस और थ्रिलर पर आधारित ‘Chasing the Unknown’ नाम की किताब लिखी है। ग्रीन सिटी निवासी शाश्वत की किताब का हाल ही में एक भव्य कार्यक्रम में लोकार्पण किया गया। समारोह में परिवार के साथ शहर के साहित्यकार, लेखक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने शाश्वत की रचनात्मक प्रतिभा की जमकर सराहना की।
ग्वालियर से करीब 25 किलोमीटर दूर घाटीगांव वन्यजीव अभयारण्य के घने जंगलों में स्थित कनेर झील प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। स्थानीय लोग इसे कनेर झिरी या कनेर झीर के नाम से भी जानते हैं। चारों ओर हरियाली, ऊंची पहाड़ियां और प्राकृतिक झरने इस क्षेत्र की खूबसूरती बढ़ाते हैं। यहां पहुंचने पर शहर के शोर से दूर शांत और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव होता है। यह जगह मानसून के दौरान विशेष रूप से मनमोहक नजर आती है।